हरिद्वार। जगद्गुरु शंकाराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि भगवान इस जगत के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। संत परंपरा उसी सनातन संस्कृति की वाहक है। भारतीय सभ्यता का यह स्वरूप एक दिन देश को विश्व के शीर्ष पद पर ले जाएगा।
शारदापीठाधीश्वर बुधवार को यहां गाजिवाली स्थित प्रेम निवासी आश्रम में आयोजित धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिष्य वही है जो गुुरु द्वारा बताए गए रास्ते पर चले। अनुभवों के आधार पर गुरु अपने शिष्य को ज्ञान प्रदान करता है। शिष्य का पहला गुण यह है कि वह गुरुदेव का आदेश न टाले। प्राचीन काल से संस्कृति इसी प्रकार बहती आ रही है। उन्होंने कहा कि गुरु कभी नहीं मरते। महापुरुष केवल अपना शरीर त्यागते है, पर भक्तों और राष्ट्र के लिए सदैव जीवित रहते हैं।
धर्म सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्यामसुंदर दास शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को शांति और सद्भाव के लिए समर्पित रहना चाहिए। महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी ने कहा कि गुरु सदा महान होते हैं। गुरु के सेवा कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए। महामंडलेश्वर प्रमोदानंद गिरी ने कहा कि संत और भगवान में विशेष अंतर नहीं है। संत आत्मा का साक्षात्कार परमात्मा से कराता है। ऐसा होने पर व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा कि ज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य जो भी करता है वह लोक कल्याणकारी है। महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद, बाबा हठयोगी दिगंबर, स्वामी आनंद चैतन्य, स्वामी विनोद गिरी आदि ने भी विचार रखे।