बहादराबाद में शौचालय पर लगा ताला ।
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आज विश्व शौचालय दिवस है और देश के साथ प्रदेश में खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) के तमाम दावे किए जाएंगे। जिम्मेदार विभाग अपनी उपलब्धियों को गिनाएंगे। बताया जाएगा कि शहर से देहात तक कितने शौचालय बने और कितने लोगों को अनुदान उपलब्ध कराया गया। जबकि धरातल पर हकीकत इससे जुदा है। शहर से लेकर देहात तक लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए शौचालयों पर ताले लटके हैं। इनके आसपास रहने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जरूरतमंद आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
सरकारी कागजों में हरिद्वार जनपद भी वर्ष 2017 में ओडीएफ घोषित हो चुका है। जिला प्रशासन का दावा है कि जनपद में अब कहीं भी खुले में शौच नहीं होता है। इसके लिए गरीब परिवारों के लिए सरकारी योजना से शौचालयों का निर्माण कराया गया है। शहरों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं। धर्मनगरी में सुलभ शौचालय का निर्माण हुआ है। लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट है। धर्मनगरी में आने वाले यात्रियों और अन्य लोगों को शौचालय होने के बाद भी परेशान होना पड़ रहा है।
कनखल के बंगाली मोड़ पर सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है। पर शौचालय पर ताले लटके हुए हैं। बताया जाता है कि सार्वजनिक शौचालय की चाबी दो दुकानदारों के पास रहती है। यही लोग इसका प्रयोग करते हैं और बाकी समय ताला लगा दिया जाता है। जबकि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। इस इलाके के रिक्शा चालक और अन्य लोग शौचालय को ताला खुलवाने की मांग उठा चुके हैं। पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसी तरह से आर्यनगर जाने वाले मार्ग पर बने शौचालय पर भी ताले पड़े हुए हैं। शौचालय होने के बाद भी यात्रियों और व्यापारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बस स्टैंड पर बना शौचालय बना शोपीस
बहादराबाद। ग्राम पंचायत क्षेत्र में आने वाले बहादराबाद में बस स्टैंड के पास सुविधायुक्त शौचालय का निर्माण कई महीने पहले किया गया था। इस शौचालय को अब तक शुरू नहीं किया गया है। यहां ताले लटके हैं। जबकि हर रोज बड़ी संख्या में गांवों से लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में बाहरी लोगों के साथ ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय में ताले लगे होने के कारण लोग खुले में शौच करने जाते हैं। संवाद