पतंजलि विश्वविद्यालय में ‘मानस गुरुकुल’ विषय पर आयोजित रामकथा के दूसरे दिन हनुमान चालीसा के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
मोरारी बापू ने कहा कि रामनाम सरल तो है किंतु यह महामंत्र है, बीजमंत्र है। कलियुग में रामनाम संकीर्तन सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने गुरु, गुरुकुल, गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को बताया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल यदि आध्यात्मिक तौर पर कोई अभ्यासक्रम निश्चित करता है तो उसकी शुरूआत हमारी पुरातन सनातन परंपरा से करता है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल सर्वप्रथम हमें धर्म प्रदान करता है, जगत में अर्थ की भी आवश्यकता है तो गुरुकुल पारमार्थिक अर्थ भी देता है, गुरुकुल हमें व्यक्ति के अनुसार कार्य भी देता है और अंतत: गुरुकुल हमें मोक्ष भी देता है।
उन्होंने कहा कि रामचरित मानस का प्रथम प्रकरण गुरु वंदना से ही प्रारंभ होता है। बालकांड व अयोध्याकांड में गुरुकुल की महत्ता को बताया गया है। स्वामी रामदेव ने कहा कि रामकथा का यह पावन अनुष्ठान और चैत्र नवरात्र में एक समर्थ गुरु का आश्रय परम सौभाग्य की बात है। गुरु सत्ता व प्रभु सत्ता के साथ हमारी एकात्मता के स्वर हमारे वेदों ने गाए हैं। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण, रामचरित मानस, श्रीमद्भगवदगीता आदि अभी तक जितने भी कालजयी ग्रंथ लिखे गए हैं, ये मात्र किसी एक व्यक्ति का पुरुषार्थ नहीं हो सकता। इसके पीछे पूरी समष्टि में भगवान का विधान कार्य कर रहा है। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण, साध्वी आचार्या देवप्रिया, डॉ. ऋतंभरा शास्त्री, प्रो. महावीर अग्रवाल, ललित मोहन, शशी मोहन आदि शामिल रहे।
परिवार संग पहुंचे कैबिनेट मंत्री
कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत अपनी पत्नी दीपा रावत व पुत्र के साथ पंतजलि विवि में रामकथा में शामिल हुए। उन्होंने स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण से आशीर्वाद लिया।