हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव योग की बदौलत न केवल आसमां पर पहुंच गए हैं, बल्कि आज उनकी गिनती विश्व के बड़े उद्योगपतियों में होने लगी है। बाबा रामदेव ने बड़े-बड़े उद्यमियों को पीछे छोड़ दिया है।
बाबा रामदेव के कारण हरिद्वार और उत्तराखंड को भी नई पहचान मिली है। गुरुकुलों की पढ़ाई करने के बाद हिमालय में तप करते हुए रामदेव और बालकृष्ण गंगा के आकर्षण में बंधकर हरिद्वार आ गए। कनखल की गलियों में कभी पैदल तो कभी साइकिल पर सवार बाबा को देखने वालों की कमी नहीं है। वर्ष 1995 में कृपालू बाग आश्रम दिव्य योग मंदिर में उन्होंने गुरु शंकर देव महाराज से संन्यास की दीक्षा ली। यहीं से योग की मशाल सारी दुनिया में जलाने का निर्णय लिया गया। पहलेे केवल दिव्य योग मंदिर में योग और आयुर्वेद का प्रचार करने वाले रामदेव ने अक्तूबर 2000 में ज्वालापुर में शिविर लगाकर आश्रम से बाहर निकलने का फैसला किया। वह दिन और आज का दिन, बाबा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पतंजलि योगपीठ के माध्यम से दोनों संतों ने विकास का जो पथ चुना वह वरदान साबित हुआ। देखते ही देखते योग के साथ आयुर्वेद विश्व पर छा गया। इन 20 वर्षों में बाबा ने अकेले हरिद्वार में 52 इंडस्ट्री खड़ी कर ली। ब्रिटेन में उनके पास द्वीप है तो देश के हर शहर में उनके योग केंद्र हैं। बाबा रामदेव का दावा है कि उनकी योग कक्षाएं अगले पांच वर्षों में देश के सभी छह लाख गांवों और शहरों में लगने लगेंगी। देेेश में आचार्यकुलम की श्रृंखलाओं के साथ-साथ आयुर्वेद विश्वविद्यालय का कार्य भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्राच्य विद्याओं के लिए एक अलग विश्वविद्यालय बाबा बनाने जा रहे हैं।