डा. प्रविंद्र कुमार
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विवि परिसर में टाटपट्टी से शुरू हुआ योग आज विश्व के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। देश में योग को एक पाठ्यक्रम के रूप में संचालित करने का श्रेय गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को जाता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 1991 में पहली बार गुरुकुल कांगड़ी विवि को एमए योग का पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति प्रदान की।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में पहली बार 1982 में एक सर्टिफिकेट कोर्स के रुप में योग की शुरुआत की गई थी। इसमें छात्रों का मूल्यांकन योगाभ्यास के आधार पर किया जाता था। 1986 में विवि में योग को एक वर्षीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया गया। इसके एक वर्ष बाद योग को बीए में एक विषय में रूप में शुरू किया गया। 1991 में यूजीसी ने विवि को एमए योग को संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी। यूजीसी की अनुमति के एक साल बाद 1992 में विवि में एमए योग की कक्षाएं शुरू की। विवि प्रशासन ने 1996 में योग में पहली बार पीएचडी शुरू कराकर योग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया। आज गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के मानव चेतना योग विज्ञान विभाग में 23 सीटों पर छात्रों को पीएचडी कराई जा रही है।
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देश में एमए योग और पीएचडी शुरू करने का श्रेय गुरुकुल कांगड़ी विवि को है। इसके बाद से अन्य विवि में योग को एक विषय में मान्यता मिली। विवि के सैकड़ों छात्र योग के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। योग के प्रचार-प्रसार के लिए विवि प्रशासन योग विभाग हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
प्रो. सुरेंद्र कुमार, कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार
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देश-विदेश में फैले गुरुकुल के योगाचार्य
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यलय के सैकड़ों छात्र देश-विदेश में पहुंचकर योग का प्रचार-प्रसार करने में जुटें है। योग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर भारद्वाज का दावा है कि भारत का एक भी बड़ा शहर ऐसा नहीं है, जहां गुरुकुल कांगड़ी विवि के छात्र योग के क्षेत्र में कार्य नहीं कर रहे हैं। चीन, कोरिया, स्पेन, अमेरिका, जापान, रूस, फिजी, नेपाल आदि देश में विवि के योग शिक्षक कार्य कर रहे हैं।
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विदेशी छात्र भी सीख रहे योग के गुर
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विवि में कई देशों के छात्र एमए योग की शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. ईश्वर भारद्वाज ने बताया कि विवि से योग की शिक्षा ग्रहण करने वालों में चीन, मॉरीशस और फिजी आदि देशों के छात्रों की संख्या अधिक है। कई विदेशी योग में पीएचडी भी कर रहे हैं। दर्जनों छात्र एमए योग की डिग्री भी प्राप्त कर चुके हैं।
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गुरुकुल से निकलकर विवि में फैला योग
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विवि में योग को एक विषय और पीएचडी के रूप में शुरू करने के बाद देश के अन्य विवि में योग को एक विषय में शुरू किया गया। अकेले हरिद्वार की बात करे तो गुरुकुल कांगड़ी विवि के अलावा उत्तराखंड संस्कृत विवि, पतंजलि विवि और देव संस्कृति विवि सहित कईं कॉलेजों में योग के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे है। प्रदेश के एचएनबी गढ़वाल विवि, कुमाऊं विवि आदि विवि में भी योग के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे है।
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