गंगा में सिक्के और धातु ढूूंढने वाले एक युवक के पास 4.35 लाख रुपये के पुराने नोट बरामद हुए हैं। युवक ने बताया कि उसे ये नोट बिरला घाट के पास एक गठरी में गंगा किनारे मिले हैं। जबकि पुलिस का दावा है कि युवक खुद इन पैसों को गंगा में बहा रहा था। पुलिस की सूचना पर आयकर विभाग की टीम ने भी हरिद्वार कोतवाली पहुंचकर युवक से पूछताछ की। नोट कब्जे में ले लिए गए हैं।
हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने बुधवार को ब्रह्मपुरी बंगाली बस्ती निवासी अरविंद विश्वास पुत्र सुधीर विश्वास को पुराने नोटों के साथ हिरासत में ले लिया। कोतवाली लाकर एसएसआई पंकज देवरानी के पूछताछ करने पर युवक ने बताया कि वह गंगा में सिक्के धातु आदि ढूंढने का काम करता है और उसे बिरला घाट के पास एक गठरी में ये नोट मिले हैं। युवक से लंबी पूछताछ के बाद एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों की गिनती कराई। जिसमें रकम रकम 4.35 लाख रुपये निकली। कोतवाली प्रभारी अनिल जोशी ने इसकी सूचना आला अधिकारियों और इनकम टैक्स विभाग को दी। उन्होंने बताया कि युवक गंगा में नोट बहा रहा था। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस टीम भेजी गई थी। उसे नोटों सहित हिरासत में लिया गया है। नोटों के संबंध में युवक से पूछताछ की जा रही है।
हीटर पर सुखाए नोट, जले साढ़े तीन हजार
एक एक हजार के तीन और पांच सौ रुपये का एक नोट आधे जले हुए भी बरामद हुए। युवक का कहना था कि गठरी के अंदर एक पॉलीथिन में नोट थे। बाहर निकालने पर कुछ नोट भीगे हुए थे। घर लाकर उसने हीटर पर नोट सुखाए। तभी साढ़े तीन हजार रुपये जल गए।
नोट मिलते ही चुकाया कर्ज, बांटा उधार
बंगाली बस्ती निवासी अरविंद भी सैकड़ों झुग्गी बस्ती वालों की तरह गंगा से सिक्के व धातु ढूंढकर अपने परिवार का गुजारा करता है। इस काम में उसे रोजाना 200 से 500 रुपये तक की आमदनी हो जाती है। कभी कभार सोना या चांदी हाथ लग जाए तो कमाई हजारों में पहुंच जाती है। अचानक लगभग लाखों रुपये हाथ लगने पर अरविंद खुशी से पागल हो गया। उसने न सिर्फ राशन दुकानदार को अपना कर्ज चुकाया, बल्कि एक परिचित को 20 हजार रुपये उधार भी दिए। पुलिस परिचित युवक से भी पूछताछ कर रही है।
आखिर किसका है लाखों का कालाधन
युवक के कब्जे से 4.35 लाख रुपये मिलने के मामले मेें कई सवाल खड़े हो रहे हैं। युवक पुलिस और इनकम टैक्स विभाग को बता चुका है कि उसे रकम गंगा किनारे मिली है। वहीं पुलिस का कहना है कि युवक खुद नोट बहा रहा था। यदि मान लिया जाए कि युवक खुद नोट बहा रहा था, तो गंगा बीनने वाले युवक के पास इतनी रकम कहां से आई। यदि रकम युवक की नहीं है तो किसने कालेधन से पल्ला झाड़ने के लिए उसे गंगा किनारे फेंका। ऐसे कई सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं।