सिस्टम में बैठे योजनाकारों की नाकामी का खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और उसमें बहने वाले गंदे नालों को रोकने के घोषित उद्देश्य से 1986 में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का गठन किया गया था।
बीते 32 साल में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की योजनाओं के नाम पर अरबों रुपये गंगा में बहाए गए। इसके बावजूद लगभग पौने तीन लाख की आबादी वाले 50 हजार भवनों को सीवर लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है। एनजीटी और हाईकोर्ट ने भी सिस्टम की इतनी बड़ी विफलता को संज्ञान नहीं लिया है। इसके लिए शहरवासियों को ही दोषी मानकर उनके विरुद्ध ही कार्यवाही की जा रही है। यह रसूख का ही कमाल है कि देहरादून जिले के हरिपुर कलां क्षेत्र को भूपतवाला, हरिद्वार की सीवर लाइन व सीवरेज पंपिंग स्टेशन से जोड़ दिया गया, लेकिन जिस भूपतवाला में सीवरेज पंपिंग स्टेशन बनाया गया है उसकी अनेक आवासीय कालोनियों में अभी तक सीवरेज की सुविधा नहीं है।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की आवासीय कालोनी श्यामलोक भूपतवाला तक में सीवर लाइन नहीं है। सीवर चोक होकर नालों से बहते हुए गंगा में पहुंचती है। गायत्री विहार, गंगोत्री विहार, जसविंद्र इंक्लेव, गंगा विहार, जीडीपुरम, सत्य विहार, श्रद्धापुरम, भारतमातापुरम, भट्टा कालोनी, ओम कालोनी आदि में सीवर की सुविधा नहीं है। गंगा नदी के अपस्ट्रीम में होने के चलते इन क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ सीवरेज सुविधा से जोड़ा जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अधिकारियों ने बड़े रसूखदारों की सुविधा के लिए जहां-तहां जुगाड़ से सीवर लाइनें डाली हैं। कनखल का बड़ा क्षेत्र भी सीवर सुविधा से वंचित है।
शहर के वंचित क्षेत्रों को अब नमामि गंगे योजना के तहत सीवर सुविधा से जोड़ा जाएगा। नगर निगम क्षेत्र का प्रत्येक घर सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा। इसकी योजना बन चुकी है। जल्दी ही काम भी शुरू हो जाएगा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से काम में तेजी आएगी।
- मनोज गर्ग, मेयर।