कैबिनेट में जनपद हरिद्वार में पंचायत चुनाव कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दावेदारों ने एक बार फिर से मिलना जुलना शुरू कर दिया है।
28 मार्च वर्ष 2021 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद प्रशासकों की तैनाती की गई। ढाई माह से पंचायतों में प्रशासक भी नहीं हैं। क्योंकि दो बार प्रशासकों का छह-छह माह का कार्यकाल बढ़ाने के बाद से तीसरी बार राज्यपाल की ओर से अनुमति नहीं दी गई है।
जिला पंचायत का 17 मई और क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल भी नौ जून को समाप्त हो चुका है। इनमें भी प्रशासक नियुक्ति नहीं किए गए हैं। अब कैबिनेट बैठक में जनपद के पंचायत चुनाव कराए जाने का निर्णय लिए जाने के बाद से गांवों में चुनावी हलचल तेज हो गई है।
सरकार के फैसले से खुश हुए ग्रामीण
पंचायत चुनाव कराने के फैसले से ग्रामीणों में खुशी है। उन्होंने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि, अभी आरक्षण की प्रक्रिया होनी बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव नहीं होने से विकास कार्य ठप हुए पड़े थे। साफ-सफाई का कार्य भी प्रभावित हुआ है। संवाद
आरक्षण पर टिकी नजर
लालढांग क्षेत्र में पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीणों में आरक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिससे आरक्षण सूची जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। लालढांग पंचायत में प्रधान सामान्य सीट आती है तो कई दावेदार निकलकर सामने आएंगे। इसलिए दावेदारों की नजर आरक्षण की सूची पर लगी हुई है। संवाद