राष्ट्रीय सरस मेले के बहाने धर्मनगरी में समूचा पहाड़ उतर आया है। चीन से सटे सीमांत पिथौरागढ़ के मुस्यारी से लेकर उत्तरकाशी के हर्षिल की राजमा, नैनीताल के कोटाबाग से लेकर चंपावत और टिहरी की गडेरी-गहत के स्टॉलों पर भीड़ उमड़ रही है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के मसालों और हर्बल टी की खुशबू लोगों को लुभा रही है। टिहरी के अरसा मुंह में मिठास घोल रहे हैं। मेले में जैविक उत्पादों की खरीदारी करने लोगों की भीड़ उमड़ रही है। लोहाघाट के लोहे की कढ़ाई का वजन देख लोग हैरत में पड़ रहे हैं।
जगजीतपुर स्थित प्रस्तावित मेडिकल कालेज मैदान में राष्टीय सरस मेला लगा है। 29 दिसंबर तक चलने वाले मेले में उत्तराखंड के अलावा देश के कई राज्यों से महिला स्वयं सहायता समूहों ने अपने उत्पादों की स्टॉल लगाए हैं। मैदान में कुल 148 स्टॉल सजे हैं। अधिकतर समूह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उत्तराखंड के अधिकतर जिलों से समूह पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों को बेचने आए हैं। युवा पीढ़ी के लिए कई पहाड़ के पारंपरिक उत्पाद कौतुक बने हैं। टिहरी की लाल मिर्च, अदरक, लहसुन जायकेदार होती है। बाहरी जिलों और राज्यों में इसकी मांग होती है। टिहरी के स्टॉल संचालक गीता रावत बताती हैं अरसा की मिठास परंपरा से जुड़ी है। अरसा गुड़-देशी घी और चावल के आटे से तैयार होते हैं। तीज-त्योहारों पर हर घर में अरसा बनते थे। पलायन से पहाड़ खाली हो गए। पलायन के साथ परंपराएं भी छूट गई हैं।
कोटाबाग की मुमताज और चंपावत की जानकी के स्टॉलों पर गडेरी, गहत, काला भट्ट, उड़द और खड़ी दालें लोगों की खींच रही हैं। मक्का, चावल और भट्ट का आटा जाड़ों में गर्म होता है। इसकी भी खूब मांग हो रही है। नैनीताल के रामगढ़ की दीपा लोधियाल के स्टॉल पर 15 तरह की वैरायटी की हर्बल टी है। चाय का उत्पाद रामगढ़ में होता है। लोहाघाट के अमित कुमार का स्टॉल लोहे की कढ़ाई, फ्राइपेन और तवों से सजा है। लोहे की कढ़ाई का वजन लोगों को हैरान कर रहा है। लोहाघाट की कढ़ाई प्रदेशभर में काफी चर्चित हैं।
मसालेदार नमक देखकर ललचा रहे लोग
द्वाराहाट अल्मोड़ा के गीता जोशी के स्टॉल पर मसालेदार नमक से सजा है। भांग, लहसुन, अदरक और तीमुर समेत कई वैरायटी का नमक है। नमक का स्वाद लोगों की जीभ पर चढ़ रहा है। ताकुला अल्मोड़ा के प्रभाकर भाकुनी का स्टॉल पेठे, गडेरी, खीरे की बड़ी, गेठी की सब्जी और मसालों से सजा है। उत्तरकाशी के हर्षिल की मीना के स्टॉल की राजमा का रंग और दाने देखकर ही लोग उसकी खासियत पूछना नहीं भूल रहे हैं। हर्षिल और मुस्यारी की राजमा 240 रुपये किलो है। मेले में शाम तक लोगों की भीड़ उमड़ रही है।