रुड़की अस्पताल के प्रकरण के सामने आने के बाद निजी अस्पताल संचालक मरीजों को भर्ती करने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। कनखल के ट्रस्ट के अस्पताल में मरीजों को भर्ती न किए जाने से सबसे बड़ी परेशानी सामने आ रही है। इसे देखते हुए सीएमओ ने फिर से आदेश जारी करते हुए मरीजों को भर्ती करने के आदेश दिए हैं।
लॉकडाउन के 23 मार्च से शुरू होने के बाद से अधिकांश निजी अस्पताल मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। शासन ने आईएमए के पदाधिकारियों को बुलाकर ओपीडी के साथ मरीजों को भर्ती करने के आदेश एक महीने पूर्व दिए थे। इस दौरान फ्लू क्लीनिक भी चलाने के आदेश दिए थे। फ्लू क्लीनिक तो मात्र एक दो निजी अस्पतालों में ही चलाया गया, लेकिन मरीज भी बामुश्किल ही भर्ती किए। आईएमए के पदाधिकारियों की माने तो कोरोना से संक्रमित मरीज के आ जाने से अस्पताल को सील कर दिया जाता है। इस भय के चलते मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। कुछ अस्पतालों के संचालकों ने जनरल ओपीडी शुरू की, लेकिन कनखल में ट्रस्ट के अस्पताल की ओर से मरीजों को भर्ती न किए जाने पर सबसे बड़ी परेशानी सामने आ रही है। सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि सरकारी और निजी अस्पतालों को बुखार, खांसी, जुकाम के मरीजों को अलग से भर्ती करने के निर्देश जारी किए थे। आइसोलेशन वार्ड भी अलग से संचालित किए जाने को गाइडलाइन जारी की थी। शीघ्र ही निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के साथ बैठक की जाएगी।