- किसानों ने डीएम से चकबंदी समाप्त करने की मांग
पथरी। नसीरपुर कलां में 40 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया अब तक समाप्त नहीं हुई है। किसानों को खसरा खतौनी की नकल लेने के लिए करीब 40 किलोमीटर दूर रुड़की में चकबंदी कार्यालय में जाना पड़ता है। इससे किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। लंबी दूरी तय कर रुड़की में चकबंदी कार्यालय जाने के कारण किसानों का समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होता है। किसानों ने डीएम मयूर दीक्षित से हस्तक्षेप कर चकबंदी प्रक्रिया समाप्त कराने की मांग की है।
नसीरपुर कलां ग्राम प्रधान प्रतिनिधि साजिद अंसारी, दिलशाद अली, आरिफ अंसारी, प्रमोद शर्मा, सोनू कुमार आदि किसानों के मुताबिक नसीरपुर कलां में सन 1982 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। चकबंदी विभाग ने सन 1992 में किसानों के चक आवंटित कर दिए थे। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने चकबंदी प्रक्रिया खत्म करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली है। नसीरपुर कलां के रकबे में बादशाहपुर, धारीवाला, टिकोला व नसीरपुर कलां के किसानों के खेत हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
चकबंदी प्रक्रिया खत्म करने में अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
गुलनाज अंसारी, ग्राम प्रधान
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चकबंदी प्रक्रिया समाप्त नहीं होने से रुड़की जाकर खतौनी की नकल लानी पड़ती है। इसमें सारा दिन गुजर जाता है। समस्या का समाधान किया जाए।
सोमप्रकाश सैनी, बादशाहपुर
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पता नहीं कब तक चकबंदी प्रक्रिया खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। इस ओर सरकार और अधिकारियों को भी ध्यान देना चाहिए, ताकि, किसान की समस्या हल हो सके।
साधुराम चौहान, धारीवाला
चकबंदी प्रक्रिया समाप्त नहीं होने से किसानों को खेतीबड़ी कार्य करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चकबंदी कर किसानों की नकन ऑनलाइन की जाए।
सुशील कुमार, झबीरण