हरिद्वार। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत घर-घर से कूड़ा उठाने और निस्तारण की जिम्मेदारी उठाने वाली कंपनी केआरएल की नगर निगम से छुट्टी हो सकती है। नगर निगम के अधिकारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अंतिम आदेश की प्रतीक्षा में हैं।
कंपनी को घर-घर से कूड़ा एकत्र करने और कूड़े का जैविक-अजैविक में अलग-अलग कर वैज्ञानिक ढंग से उसका निस्तारण कराना था। लेकिन दो साल में वह नगर निगम के सभी वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्रीकरण तक नहीं करा पाई है। कंपनी कूड़ा निस्तारण के लिए कंपोस्ट प्लांट भी नहीं लगा पाई है। केंद्र की स्वीकृति के बाद भी कंपनी पर्यावरणीय एनओसी नहीं ला पाई है। कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन भुगतान भी नहीं कर पा रही है और दो बार कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा उन क्षेत्रों के लोगों को भुगतना पड़ा जो कंपनी को प्रति माह भुगतान कर रहे हैं। कंपनी टिपिंग शुल्क के नाम पर नगर निगम से भी पैसा ले रही है। इसके अलावा जिन वार्डों में वह काम कर रही है वहां से घर-घर से यूजर चार्जेज भी वसूला जा रहा है।
---------------
कंपनी अनुबंध की एक भी शर्त का पालन नहीं कर रही है। उसने कंपोस्टिंग प्लांट लगाने के लिए कुछ नहीं किया है। बार-बार कहने के बाद भी सभी वार्डों में काम शुरू नहीं किया गया है। एनजीटी का फाइनल आदेश एक दो दिन में आने की उम्मीद है। सराय के लोग भी एनजीटी में गए थे। आदेश आने के बाद कंपनी के कार्य की समीक्षा की जाएगी। सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है इसलिए उसका अनुबंध समाप्त भी किया जा सकता है।
-----विप्रा त्रिवेदी, एमएनए, नगर निगम