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12 साल में गंगा किनारे 550 से ज्यादा अवैध निर्माण

Thu, 28 Feb 2013 02:18 PM IST
हरिद्वार/ब्यूरो
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पिछले बारह वर्षों में गंगा तट पर साढ़े पांच सौ से ज्यादा अवैध निर्माण खड़े हो गए और जिम्मेदार एजेंसी हरिद्वार विकास प्राधिकरण (एचडीए) के अधिकारी सोये रहे। इस दौरान एचडीए के अधिकारियों ने केवल नोटिस देकर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।
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यदि अवैध निर्माण होते समय ही एचडीए ने जिम्मेदारी निभाई होती तो आज हाईकोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना पड़ता। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद एचडीए और अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप है। एचडीए गंगा तट पर बने निर्माणों की कुंडली खंगालने में जुट गया है।

हाईकोर्ट के आदेश का ईमानदारी से पालन किया गया तो हरिद्वार शहर की सूरत बदल जाएगी। कई होटल, लॉज और आवास धराशायी हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ कहा है कि हरिद्वार विकास प्राधिकरण ऋषिकेश, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल में गंगा नदी के किनारे 200 मीटर के दायरे में बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करे।
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नियमानुसार गंगा तट से 200 मीटर की परिधि में कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। लेकिन आज तक यह नियम कागजों में ही है। एचडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1998 से वर्ष 2009-10 तक हरिद्वार में 200 मीटर के नियम का उल्लंघन कर गंगा तट पर 365 निर्माण किए गए हैं। नियम का उल्लंघन करने में ऋषिकेश क्षेत्र भी अछूता नहीं है। यहां पर 200 निर्माण अवैध माने गए हैं। एचडीए ने इनका चालान भी किया है। कई के विरुद्ध ध्वस्तीकरण के आदेश भी दे रखे हैं। लेकिन आज तक एक भी अवैध निर्माण ध्वस्त नहीं किया है।

एचडीए के पास तो केवल वर्ष 2009-10 तक का डाटा है। इसके बाद की बात करें तो गंगा तट पर तेजी से अवैध निर्माण हुए हैं। पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में बहुमंजिले निर्माण हुए हैं। एचडीए ने हमेशा गंगा तट से 200 मीटर के प्रतिबंध को अवैध कमाई के लिए लागू तो किया, लेकिन गंगा को बचाने के उद्देश्य से उसने किसी भी निर्माण को रोका नहीं। अब हाईकोर्ट ने गंगा तट से 200 मीटर की परिधि में बने निर्माण ध्वस्त करने का आदेश दिया है तो एचडीए के अधिकारी सक्रियता दिखा रहे हैं।

सरकारी विभागों ने भी उड़ाई धज्जियां
गंगा किनारे 200 मीटर के अंदर निर्माण कार्य पर रोक का उल्लंघन केवल निजी बिल्डरों ने ही नहीं किया, बल्कि कई सरकारी विभागों ने भी अवैध निर्माण किए हैं। निरंजनी अखाड़ा रोड पर पार्किंग स्थल पर निर्माण चल रहा है। जल संस्थान ने पंतद्वीप में बिना नक्शे के मुख्यालय का निर्माण कराया है। यहां सीवरेज की भी व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2004 में मेला नियंत्रण भवन का निर्माण 200 मीटर के प्रतिबंध की अवहेलना कर किया गया है। पर्यटन विभाग ने भी निर्माण कराया है।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेंगे
 गंगा किनारे 200 मीटर के भीतर बने अवैध निर्मार्णों के ध्वस्तीकरण का हाईकोर्ट का आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।
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- चंद्रशेखर भट्ट, उपाध्यक्ष एचडीए

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