धन्वंतरि त्रयोदशी के उपलक्ष्य में पतंजलि योगपीठ स्थित यज्ञशाला में ‘आयुर्वेद फॉर पोषण’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने महर्षि धन्वंतरि की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्प अर्पित किए।
स्वामी रामदेव ने कहा कि महर्षि धन्वंतरि ने आयुर्वेद के रूप में अमृत के समान निरापद चिकित्सा पद्धति लोकोपचार के लिए अनुसंधित की, जिसका लाभ आज समूची मानवता को मिल रहा है। सनातनता एवं नूतनता का समन्वय जब होता है तब जीवन में उत्सव एवं उत्साह आता है। उन्होंने कहा कि वक्त रहते पूरा विश्व योग, यज्ञ, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सनातन संस्कृति की शरण में नहीं आया तो विश्व के लिए यह आत्मघात करने जैसा होगा।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि धन्वंतरि जयंती का पावन दिन पूरा देश धनतेरस के रूप में मनाता है। उन्होंने कहा कि धन्वंतरि जयंती पर आयुष मंत्रालय की ओर से ‘आयुर्वेद फॉर पोषण’ कार्यक्रम का आयोजन देश में किया जा रहा है। पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय अपनी सहभागिता दर्ज कर रहा है। इस दौरान महर्षि धन्वंतरि की वंदना के लिए पुस्तिका ‘श्रीधन्वन्तरि-स्तवनम’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर प्रो. वरखेड़ी, प्रो. ओझा, साध्वी देवप्रिया, प्रो. महावीर, ऋतंभरा, राकेश, एनपी सिंह, डॉ. अनुराग वार्ष्णेय, स्वामी परमार्थ देव, प्रो. अनिल यादव, आराधना कोल, प्रो. मनोहर लाल आर्य, डॉ. एलआर सैनी, साधना मौजूद रहे।