हरिद्वार। हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे के चौड़ीकरण और फोरलेन बनाने की राह आठ साल में भी आसान नहीं दिख रही है। हालत यह है कि इस मार्ग के चौड़ीकरण कार्य में आठ साल से अधिक समय बीत गया। निर्माण शुरू होने के बाद से ही जगह-जगह बदहाली का दृश्य दिखने लगा है। पुराने मार्ग से होकर गुजर रहे वाहनों को न तो सुविधा दी जा रही है और हादसों को लेकर भी कोई चिंता नहीं है।
बीते सोमवार को हुई तेज बारिश के बाद हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर चलना आसान नहीं रह गया। वर्तमान स्थिति यह है कि चंडी देवी पुल पार करने के बाद से ही मार्ग वन-वे हो चुका है। इसमें कई जगह श्यामपुर कांगड़ी और लालढांग मोड़ तक डायवर्जन किए जा चुके हैं। इसका परिणाम यह है कि चार पहिया वाहन बड़े वाहनों के पीछे हादसे का शिकार हो रहे हैं। श्यामपुर पुलिस के दुर्घटना रिकॉर्ड को देखें तो प्रत्येक सप्ताह दो से अधिक छोटी बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
बावजूद इसके कि निर्माण कार्य को तेज गति से पूरा किया जाए, एनएचएआई पुराने वैकल्पिक मार्ग के सुधारीकरण को भी भूल गया है। सड़क मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन चुके हैं। वहीं कई जगह डायवर्जन पर ही रेत और बजरी उखड़ी पड़ी है। मार्ग का सुधारी करण करने की आवश्यकता भी एनएचएआई नहीं समझ रहा है।
दावा 90 प्रतिशत काम पूरा होने का बावजूद इसके 2026 तक का लक्ष्य
एनएचएआई का दावा है कि करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। काम अंतिम चरण में है। बावजूद इसके एनएचएआई का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक का है। इस निर्णय से अहम सवाल उठ रहा है कि इतने दिनों तक राहगीर दुश्वारियों को कैसे झेलेंगे। एनएचएआई ने जो वैकल्पिक मार्ग आवागमन के लिए दिया है उसकी सुध लेने को तैयार नहीं है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक संकेश शर्मा का कहना है कि हाईवे चौड़ीकरण का कार्य दिसंबर 2026 तक चंडी चौक से लेकर नगीना तक पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि इस मार्ग में जंगल के क्षेत्र लालढांग, रसियाबड़, चिड़ियापुर समेत कुछ स्थानों पर एलिफेंट कॉरिडोर बनाए जाने हैं, जिसकों लेकर समय लगेगा। यह निर्माण कार्य कुंभ से पहले अप्रैल 2027 तक पूरा होगा। सवाल यह है कि इन दो वर्षों के बीच एनएचएआई के पास वैकल्पिक मार्ग के सुधारीकरण को लेकर अभी तक कोई योजना नहीं है।
तेज बारिश से बहकर हाईवे पर आया मलबा फिसलन से बढ़ी समस्या
सोमवार को हुई तेज बारिश के बाद मंगलवार को सुबह भी बारिश हुई। इसका हाल यह रहा कि दिन में तमाम जगह जहां पर एप्रोच बनाने के लिए मिट्टी रखी गई है वह बहकर वैकल्पिक मार्ग पर आ गई। इससे फिसलन बढ़ गई। कई छोटे वाहन जो तेज गति से मार्ग पर पहुंचे वह मिट्टी और फिसलन वाली जगहों जैसे श्यामपुर कांगड़ी रसियाबड़ व चंडी चौकी के पास अनियंत्रित होते रहे। पूरे दिन दुर्घटनाएं टलती रहीं, बावजूद इसके एनएचएआई का कोई जिम्मेदार इसकी सुध नहीं लिया।