आपदा से लोगों को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का काम करने का तरीका भी गजब है। बरसात के मौसम में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़-राहत बचाव के निर्माण कार्यों के लिए बजट अब जारी हुआ है। ऐसे में कब कार्य शुरू होंगे बड़ा सवाल है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इन कार्यों से आने वाले सालों में लोगों को फायदा होगा।
जिला प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन बजट से बाढ़ से बचाने के लिए न्यूनीकरण योजना से बजट जारी किया जाता है। इसमें खास बात यह रहती है कि यह पैसा ऐसे स्थानों पर खर्च किया जाता है, जहां कोई भी विभाग धन के अभाव में बाढ़-राहत बचाव के लिए निर्माण कार्य नहीं कर सकते हैं। इसमें बरसात में जल निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम तैयार करना, तटबंध का निर्माण करना शामिल है।
वित्तीय वर्ष में यह बजट एक बार मिलता है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए जिला प्रशासन को एक करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ है। जिसमें से 75 लाख रुपये के कार्यों करने के लिए स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है। शेष 25 लाख के कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन इन कार्यों को शुरू करने के लिए बजट मिलने में काफी देरी हो चुकी है। दरअसल, अब बरसात का मौसत चल रहा है। पहाड़ों पर बारिश होने से गंगा भी उफान पर है। इससे बाढ़ का खतरा हर समय बन है। अब कार्य शुरू होने पर बाढ़-राहत बचाव का लाभ पता नहीं कब मिलेगा।
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कोरोना संक्रमण के चलते बजट मिलने, प्रस्ताव बनाने और फिर निर्माण कार्यों को मंजूरी मिलने में देरी हुई है। यह बजट पूरे वित्तीय वर्ष का होता है। इसलिए बजट से कराए जाने वाले बाढ़-राहत निर्माण कार्यों से लोगों को आने वाले साल में भी काफी फायदा होगा। - मीरा कैंतुरा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार