धान का समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद भी सरकार की तरफ किसानों को दिए जाने वाले बोनस को लेकर अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि बोनस के आदेश नहीं होने के कारण ही किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने से बच रहे हैं।
जनपद में लगभग 14 हजार हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार किसानों ने धान की रोपाई की है। सरकार की ओर से धान खरीद के लिए 20 खरीद केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों पर सामान्य धान का मूल्य 1940 रुपये और ग्रेड एक के धान के दाम 1960 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। हर साल किसानों को धान के दामों के साथ अलग से 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस के रूप में दिए जाते रहे हैं। इस साल सरकार की ओर से धान बेचने पर किसानों के लिए बोनस की घोषणा अब तक नहीं की गई है।
बोनस नहीं मिलने के कारण किसान सरकारी केंद्रों की तरफ धान बेचने की तरफ अभी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जनपद में बनाए गए केंद्रों पर करीब एक सप्ताह गुजर जाने के बाद भी धान खरीद नहीं हो सकी है, जबकि खुले बाजार में धान की खरीदारी करीब दो सप्ताह से चल रही है। भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के जिलाध्यक्ष चौधरी विकेश बालियान का कहना है कि सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है।
अभी तक केंद्रों पर धान की खरीदारी शुरू नहीं हो सकी है। किसानों को लगातार धान की खरीद केंद्रों पर करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। बात रही बोनस की तो अभी सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। आदेश जारी किए जाएंगे तो किसानों को बोनस भी दिया जाएगा।
- लता मिश्रा, उप संभागीय विपणन अधिकारी, गढ़वाल