वन विकास निगम क्षेत्र में रवासन और कोटवाली में तीन जगह खनन खोल दिया गया है। जबकि पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हाईकोर्ट की ओर से खनन पर रोक लगाई गई थी। अचानक खनन खुलने पर मातृसदन ने सवाल उठाते हुए वन विकास निगम से 48 घंटे में जवाब मांगा है। इसे आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए चुनाव आयोग जाने की भी पूरी तैयारी है।
सोमवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने बताया कि वन विकास निगम क्षेत्र में रवासन-1 और रवासन-2 व कोटवाली में खनन के लिए पिछले साल केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मांगी गई थी। दो मई को पर्यावरण मंत्रालय की टीम ने वन विकास निगम के अधिकारियों और मातृसदन के साथ श्यामपुर, मीठीबेरी, बिशनपुर आदि क्षेत्रों का जायजा लिया था। 13 जून 2015 को जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि वन क्षेत्र में खनन नहीं होगा। इसके बाद छह दिसंबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेक्शन पांच लागू करते हुए भी खनन पर रोक लगाई। इसके बाद हाईकोर्ट ने खनन प्रतिबंधित करते हुए डीएम व एसएसपी की जिम्मेदारी तय की। इसके बावजूद वन विकास निगम क्षेत्र में कैसे खनन शुरू कर दिया गया। स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया कि हरीश रावत खनन समर्थक होने के साथ ही इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में यह आचार संहिता का भी खुला उल्लंघन है। इसके लिए निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा जाएगा।
उच्च बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन तक नहीं
स्वामी शिवानंद के मुताबिक हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी कहा था कि खनन के लिए उच्च बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन किया जाए। लेकिन सीमांकन तो दूर उच्च बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का सर्वे तक नहीं हुआ। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का भी खुला उल्लंघन है। इसके लिए हाईकोर्ट में अवमानना का वाद भी दायर कराया जाएगा।