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हौसले की पिच पर दिव्यांगता को कर रहे क्लीन बोल्ड

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महक उठती धरा स्पर्श से, छू लेते गगन जो चाह ले, लड़खड़ाते कदम गर बढ़ गए, समंदर भी इनको राह दे, विकलांग नहीं दिव्यांग है ये प्रसिद्ध शायर की यह चंद लाइन अजरानंद अंध विद्यालय के इन छात्रों पर सटीक बैठती है। जिनकी अंगुलियों के इशारे पर हारमोनियम, तबला, गिटार बजते हैं और कंप्यूटर का की बोर्ड चलता है।
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चुनौतियां कितनी भी हों, मगर जुनून और हौसला है तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है। इसका बेमिसाल उदाहरण हैं दिव्यांग प्रतिभाएं, जिन्होंने शारीरिक कष्ट व आर्थिक तंगी के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए खुद को साबित किया। आज ये प्रतिभाएं किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। दिव्यांग दिवस पर अजरानंद अंध विद्यालय में पढ़ाई कर रहे इन बच्चों से आज आपका परिचय कराते हैं। विद्यालय में छात्रों के लिए अलग-अलग कक्ष बने हुए हैं। इसके साथ ही छात्र यहां पर कंप्यूटर की शिक्षा भी ग्रहण करते हैं। कंप्यूटर में आया टोकन सॉफ्टवेयर यूएसए से आया है। जिससे छात्रों को कंप्यूटर क्लास लेने में दिक्कत नहीं होती है। वहीं ब्रेल प्रेस स्वीडन से लाकर लगाई गई है। संवाद
बीए-बीएड व प्रभाकर है शिक्षक
विद्यालय में बच्चों को संगीत गायन व वादन की शिक्षा देने वाले शिक्षक संजय गोस्वामी मूल रूप से काशीपुर के रहने वाले हैं और आंखों से दिव्यांग है। उन्होंने बीए करने के बाद बीएड व संगीत में प्रभाकर की डिग्री प्राप्त की है।
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रेलवे से लेकर सचिवालय में करते हैं नौकरी
अजरानंद अंध विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र अमर सिंह निषाद पूर्वांचल से हैं और मुरादाबाद में रेलवे में नौकरी कर रहे हैं। वहीं संजय रावत उत्तरकाशी के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह श्रीनगर केंद्रीय विद्यालय में संगीत अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह क्रिकेट के एक अच्छे खिलाड़ी हैं। वहीं सुरेश मौर्य सुल्तानपुर के रहने वाले हैं और इस समय दिल्ली में सरकारी विभाग में तैनात हैं और क्रिकेट के बेहतर खिलाड़ी है। कई प्रतियोगिता में वह मेडल भी अपने नाम कर चुके हैं। वहीं नरेशपाल इस समय देहरादून सचिवालय में क्लर्क है।
विद्यालय में पढ़ाई करते हैं 70 बच्चे
स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय हाईस्कूल 1960 से संचालित है। वर्तमान में उसमें 70 दिव्यांग छात्र पढ़ाई करते हैं। यह हिंदी अंग्रेजी से लेकर संगीत गायन, वादन की शिक्षा ग्रहण करते हैं। प्रदेश में विद्यालय में पहला अंध विद्यालय है जिसे उत्तरांचल बोर्ड से मान्यता प्राप्त है।
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विद्यालय में 70 छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। कई छात्र यहां पर शिक्षा ग्रहण करने के बाद रेलवे, देहरादून सचिवालय व दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं।
- स्वामी स्वयमानंद, परामाध्यक्ष अंजरानंद ट्रस्ट
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