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हेट स्पीच: देशभर में आलोचना, हरिद्वार में खामोशी

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डीएम कार्यालय के बाहर सभा करते आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता। - फोटो : HARIDWAR
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विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। हरिद्वार में रैलियां और जनसभाएं हो रही हैं। धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए भ्रष्टाचार, बेरोजगारी को मुद्दा और विकास कार्य करने का वादा किया जा रहा है। चुनावी सरगर्मी के बीच हरिद्वार की धर्म संसद की भड़काऊ भाषण की देशभर में आलोचना हुई है। नेता से लेकर अभिनेता तक हर किसी ने निंदा की है। उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू तक को विवादित बयानों की निंदा करनी पड़ी है। लेकिन हरिद्वार के सियासी दल खामोश हैं। राजनीतिक दलों को सामाजिक सद्भाव की नहीं बल्कि वोट बैंक की चिंता सता रही है।
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हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर तक तीन दिवसीय धर्म संसद हुई थी। इसमें संप्रदाय विशेष के लोगों पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग हुआ। विश्व स्तर पर इसकी गूंज उठी। वायरल वीडियो में हेट स्पीच की हर कोई आलोचना कर रहा है। हरिद्वार के कई बड़े संत इस मामले में खामोश हैं। जबकि एक विशेष समुदाय के लोग हेट स्पीच के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठा रहे हैं। सड़क से लेकर पुलिस मुख्यालय तक प्रदर्शन कर चुके हैं। हेट स्पीच के आरोपी संतों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हैं। संवाद
पुलिस पर बढ़ा दबाव तो कप्तान छुड़वा रहे पिंड
उत्तरी हरिद्वार के वेद निकेतन में आयोजित हुई तीन दिवसीय धर्म संसद की हेट स्पीच की देशभर में आलोचना होने से उत्तराखंड पुलिस पर दबाव पड़ा है। जिसके बाद मुकदमे दर्ज होने और एसआईटी गठन हुआ है। मुकदमे की तफ्तीश चल रही है, लेकिन पुलिस कप्तान डॉ. योगेंद्र कुमार रावत पूरे मामले से खुद का पीछा छुड़वाते नजर आ रहे हैं। एसएसपी ने मीडिया कर्मियों का फोन रिसीव करना ही बंद कर दिया है। जबकि कप्तान के पास सीयूजी नंबर रहता है। इसकी शिकायत पर डीजीपी को कप्तान को तलब करना पड़ा है।
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कोतवाल की हंसी ने कराई पुलिस की किरकिरी
भूपतवाला स्थित शांभवी धाम में वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी के आने की सूचना मिलने के बाद उन्हें नोटिस तामील कराने गए शहर कोतवाल राकेंद्र कठैत की हंसते हुए वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। जिसके बाद से हरिद्वार पुलिस की काफी किरकिरी हुई। इसमें डीजीपी अशोक कुमार को हस्तक्षेप करना पड़ा।
- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संतों का सम्मान करते हैं। हर कोई अपनी जगह सही है। संतों की धर्म संसद और विरोध करने वालों से पार्टी का कोई मतलब नहीं है।
- जयपाल सिंह, चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा
- वोटों की राजनीति है, इसलिए कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। खासकर वह पार्टी जो हमेशा इसी मुद्दे को लेकर चलती है। उसे डर की है कि उसका वोट बैंक खिसक सकता है।
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- संजय अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष कांग्रेस
- हमारी पार्टी कभी ऐसे मामलों में नहीं पड़ती है। हमारा मुख्य उद्देश्य जनता को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
- हेमा भंडारी, महिला मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष आप
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