कोरोनाकाल में हर तरह का व्यापार मंदी के दौर से गुजरा। सबसे ज्यादा असर होटल के कारोबार पर पड़ा था। अब चारधाम यात्रा चलने और वीकेंड पर उमड़ रही यात्रियों की भीड़ ने हालात बदल दिए हैं। जो होटल मालिक पहले अपने होटलों को बेचने की तैयारी कर रहे थे, वह अब लीज पर भी देने की बजाय खुद संचालन कर रहे हैं।
धर्मनगरी को संस्कृति के साथ-साथ उत्तराखंड की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। हरिद्वार में होटल कारोबार से लेकर खाने-पीने के रेस्टोरेंट व छोटी-छोटी गुमटियां पर भी व्यापार होता है। धर्मनगरी हरिद्वार में ज्वालापुर से लेकर सप्तऋषि क्षेत्र और कनखल से लेकर रानीपुर क्षेत्र तक 300 से अधिक छोटे व बड़े होटल हैं। इनमें कई बड़े होटल हैं। कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन से धर्मनगरी के होटल कारोबार की कमर टूट गई थी। व्यवसायी वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता था।
लंबे समय पर होटलों पर ताले लटकने से मालिकों को बिजली-पानी का खर्चा उठाना मुश्किल हो गया था। ऐसे में इनके सामने सिर्फ होटलों को बेचने का ही रास्ता बचा हुआ था। कई लोगों ने प्रॉपर्टी डीलरों के चक्कर काटने शुरू कर दिए थे। इस साल प्रदेश सरकार ने अनलॉक की प्रक्रिया शुरू करने के साथ कई तरह की पाबंदियां हटा दी थी। चारधाम यात्रा को भी बिना किसी पाबंदी के शुरू किया गया।
सरकार के इस फैसले का असर दिया और गर्मी का सीजन शुरू होते ही बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों से लोग उत्तराखंड का रुख करने लगे। चारधाम यात्रा के बाद तो हर दिन हजारों लोग यहां पहुंच रहे हैं। वीकेंड पर तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। इसका असर शहर के दूसरे कारोबार के साथ होटल व्यवसाय पर भी दिखा।
चारधाम यात्रा के बाद यहां के होटल, धर्मशाला और लॉज पूरी तरह से फुल चल रहे हैं। होटल का जो साधारण कमरा कोरोनाकाल में 300 से 500 रुपये में मिल रहा था। वह अब एक हजार से 1200 रुपये के करीब पहुंच गया। वहीं एसी रूम जो 1 हजार में मिल जाता था। उसका किराया अब 2 से ढाई हजार रुपये पहुंच गया है। कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि होटलों में कमरे ही नहीं मिल पाते। संवाद
लीज पर लेने वालों की लंबी लाइन
कोरोनाकाल के बाद जिन लोगों ने होटलों केे लीज पर लिया हुआ था वह भी खर्च से बचने को छोड़ दिया था। अब वह लीज पर लेने के लिए फिर से तैयार हैं। मगर इस बार होटल मालिक लीज पर देने को तैयार नहीं है। लीज पर लेने वाले लोग होटलों के मुंहमांगे दाम भी देने को तैयार हैं।
कोरोनाकाल में शहर के अत्याधुनिक से साधारण होटल को सेल के लिए कॉल आ रही थी। अब चारधाम यात्रा से होटल का कारोबार चल पड़ा है। अब कोई भी मालिक होटल को नहीं बेचना चाहता है।
- अनिल कपूर, प्रॉपर्टी डीलर, हरिद्वार
- कोरोनाकाल के बाद होटल मालिक अपने होटलों केे बेचने के लिए तैयार थे। मगर अब चारधाम यात्रा के बाद से कोई भी इंक्वायरी नहीं चल रही है। इस समय कोई बेच भी रहा तो दाम पहले के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं।
- रोहन प्रॉपर्टी डीलर, हरिद्वार