हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेले का आगाज हो चुका है। पहले स्नान के लिए केवल तीन दिन शेष रह गए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अभी अधूरी हैं। अभी तक अस्पताल भी बनकर तैयार नहीं हो सके हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य विभाग को अभी तक अर्द्धकुंभ के लिए पर्याप्त स्टाफ मुहैया नहीं कराया जा सका है। 184 डाक्टर मांगने के बाद केवल 31 डाक्टर ही मिले। इनमें से भी छह अवकाश पर चले गए हैं। यही हाल अन्य स्टाफ का है। इनमें से 84 के सापेक्ष एक भी एएनएम नहीं आईं हैं।
अर्द्धकुंभ की तैयारियां शासन ने अगस्त-2014 में शुरू कर दी थी। सभी विभागों से कार्ययोजना लेकर सितंबर 2014 में ही बजट जारी करने और स्टाफ से संबंधित कार्ययोजना शासन को भेज दी गई थी। इसके बाद सभी विभागों को धरातल पर काम करने के निर्देश दिए गए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सबसे अधिक पिछड़ गया। हालांकि मेला क्षेत्र की साफ-सफाई का कार्य पहले ही एजेंसी को दे दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का अस्थायी अस्पताल तैयार नहीं हुआ है। स्टाफ भी पूरा नहीं आ सका है। हालत यह है कि व्यवस्थाएं बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी ने एक भी बैठक तक नहीं की। अकेले मेलाधिकारी समस्याओं को लेकर बार-बार स्वास्थ्य महानिदेशक को कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन स्टाफ तक मुहैया नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 184 डाक्टर मांगे जाने के बावजूद कुल 31 डाक्टर ही मिले हैं जिनमें से कई तो ज्वाइन करने के बाद अवकाश पर चले गए हैं। इन डाक्टरों में से अभी तक एक ने भी ओपीडी नहीं संभाली है। फार्मेसिस्ट भी कुल 56 ही मिले हैं। एएनएम एक भी नहीं भेजी गई है, जबकि 74 एएनएम मांगी गई थीं। मेला अस्पताल के लिए मिले 35 लाख रुपये में से सिंचाई विभाग ने मरम्मत आदि का कार्य शुरू तक नहीं किया है। अब तीन दिन में कार्य पूरे होने पर कई सवाल उठने लगे हैं।
तीनों बड़े अस्पताल बनकर तैयार
मेला स्वास्थ्य अधिकारी डा. बीएस जंगपांगी ने बताया कि 20 बेड के तीनों अस्पताल बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा महिला घाट, मालवीय द्वीप, सुभाष घाट, वीआईपी घाट पर प्राथमिक उपचार केंद्रों पर जरूरी उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके अलावा बैरागी, दक्षद्वीप, भूपतवाला में 10 बेड के अस्पताल बनाने की तैयारी की जा रही है। शीघ्र ही ये अस्पताल भी शुरू हो जाएंगे।
शासन से स्टाफ नियुक्ति के मामले में कतई सहयोग नहीं मिल रहा है। अभी तक पूरा स्टाफ नहीं दिया गया है। उपलब्ध कराए गए संसाधनों से अस्थायी अस्पताल आदि की व्यवस्था की जा रही है। उम्मीद है कि सोमवार से कार्यों में तेजी आए।
-डा. बीएस जंगपांगी, स्वास्थ्य मेला अधिकारी।
दो महीने पहले सिंचाई विभाग को अर्द्धकुंभ बजट से 35 लाख रुपये की धनराशि मंजूर हो चुकी है। लगातार संपर्क करने के बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी कार्य नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में मरम्मत का कोई कार्य नहीं हो सका है। लिफ्ट, बिजली फिटिंग, ऑपरेशन, इमरजेंसी, फर्नीचर आदि में कोई कार्य नहीं हो सका।
डा. एचके सिंह, अधीक्षक, मेला अस्पताल।