केंद्र की नई शिक्षा नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों को अंग्रेजी माध्यम के प्ले स्कूलों की तर्ज पर चलाने की योजना बनाई गई है। जिन केंद्रों को प्ले स्कूल की तरह बनाने का सपना देखा जा रहा है, उनका अपना भवन तक नहीं है। पथरी क्षेत्र में अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीणों के घरों में संचालित हो रहे हैं।
पथरी क्षेत्र में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र तो खोल दिए गए हैं, पर उन्हें संचालित करने के लिए भवनों का निर्माण आज तक नहीं हो सका है, जबकि सरकार उन्हें नई शिक्षा नीति से निजी प्ले स्कूलों की तर्ज पर प्ले स्कूलों में परिवर्तित करने की योजना बना रही है। ताकि उन्हें बेसिक शिक्षा के साथ समाहित किया जा सके। हालांकि, प्री-प्राइमरी स्तर का अक्षर ज्ञान कराने की जिम्मेदारी केंद्रों को पहले से ही दी गई है।
क्षेत्र में स्थिति यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र अपने भवनों में चलने की बजाय आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के घरों पर संचालित हो रहे हैं। शेरपुर में दो आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एक भी भवन नहीं है। भट्टीपुर में दो आंगनबाड़ी सेंटर है। यहां एक आंगनबाड़ी भवन है। बादशाहपुर में छह आंगनबाड़ी सेंटरों पर पांच भवन हैं। टिकौला में चार और हरसीवाला में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं और भवन किसी का भी नहीं। धारीवाला और शाहपुर में चार-चार आंगनबाड़ी सेंटरों और महज एक-एक भवन बना है।
सरकार की ओर से प्ले स्कूल खोलने की योजना तो अच्छी है, पर पहले केंद्रों के लिए भवन तो बनाए जाएं। तभी तो प्ले स्कूल भी चल सकेंगे।
- बिल्लू चौहान, हरसीवाला
योजना बनाने से कुछ नहीं होता है। सरकार को चाहिए कि उसे धरातल पर उतारे। पहले आंगनबाड़ी केंद्रों का ही ठीक से संचालन किया जाए।
- सुशील चौहान, पूर्व प्रधान बादशाहपुर
जो आंगनबाड़ी केंद्र घरों में चल रहे हैं। ग्रामीण उन केंद्रों में अपने बच्चे भेजने से बचते हैं। सरकार प्ले स्कूलों पर पैसा बर्बाद करने से पहले भवन बनवाए।
- सरदार संजय सिंह, शाहपुर शीतलाखेड़ा
जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी भवन नहीं हैं। बजट उपलब्ध होने पर उन स्थानों पर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जाएगा।
- वर्षा, सीडीपीओ