चैत्र माह का आरंभ हो चुका है। हर वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नौ दिनों तक चैत्र नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। वैसे तो साल भर में चार नवरात्र आते हैं। जिसमें चैत्र और शारदीय के अलावा दो गुप्त नवरात्र होते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 2 अप्रैल से हो रहा है। इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं होने से नवरात्र का महोत्सव पूरे नौ दिन का होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होगी। मां दुर्गा को सुख समृद्धि और धन की देवी माना जाता है।
नारायण ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य विकास जोशी के अनुसार चैत्र नवरात्र में मकर राशि में शनि देव मंगल के साथ रहेंगे। जो पराक्रम में वृद्धि करेंगे। शनिवार से नवरात्र का प्रारंभ शनिदेव का स्वयं की राशि में मकर में मंगल के साथ रहना सिद्धि कारक होगा। माता के भक्तों को इस दौरान कार्यों में विशेष सफलता के साथ मनोकामना की पूर्ति और साधना में सिद्धि मिलेगी। चैत्र नवरात्र में कुंभ राशि में गुरु शुक्र के साथ रहेंगे। मीन राशि में सूर्य के साथ बुध होने से सूर्य बुध आदित्य योग का निर्माण होगा। चंद्रमा मेष, राहु वृषभ में तथा वृश्चिक में केतु विराजमान रहेंगे। इस चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी।
नवरात्र की शुरुआत रविवार या सोमवार से होती है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। नवरात्र की शुरुआत मंगलवार या शनिवार से होती है तो माता रानी घोड़े पर सवार होकर आती हैं। नवरात्र की शुरुआत बृहस्पतिवार या शुक्रवार से होती है तो मां डोली पर सवार होकर आती हैं। चैत्र नवरात्र की शुरुआत शनिवार से हो रही है, इसलिए मां का वाहन घोड़ा है। नवरात्र के दौरान माता रानी की विधि-विधान से पूजा करने पर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चैत्र नवरात्र के दौरान 9 अप्रैल शनिवार को महाअष्टमी है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाएगी। राम नवमी का त्योहार 10 अप्रैल रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। इस दिन लोग कन्याओं को भोजन कराकर व्रत पारण करेंगे।
नवरात्र में बनेंगे विशेष शुभ योग
नवरात्र में रवि पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, नवरात्र के प्रभाव को और बढ़ाएंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग का संबंध लक्ष्मी से है। इस योग में कार्य करने से कार्यों की सिद्धि होती है। वहीं रवि योग समस्त दोषों को नष्ट करने वाला माना जाता है। इसमें किया गया कार्य हमेशा फलीभूत होता है।
चैत्र नवरात्र का महत्व
चैत्र नवरात्रि नव संवत्सर की पहले नवरात्र होते हैं। ब्रह्म पुराण में नवरात्र के पहले दिन आधा शक्ति प्रकट हुई थी और देवी के आदेश पर ब्रह्मा ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। इसी दिन से नया संवत 2079 प्रारंभ होगा। वहीं मत्स्य पुराण में चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसके बाद श्री विष्णु ने भगवान राम के रूप में अपना सातवां अवतार भी चैत्र नवरात्र में ही लिया था। इसलिए चैत्र नवरात्र का अपना एक विशेष महत्व है।
चैत्र नवरात्रि के घट स्थापना शुभ मुहूर्त चैत्र घट स्थापना शनिवार : 2 अप्रैल
घट स्थापना मुहूर्त : सुबह 06.10 से 08.31 तक
घट स्थापना अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12.00 से 12.50 तक
घट स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ : 01 अप्रैल 01 को 11.53 सुबह
प्रतिपदा तिथि समाप्त : 02 अप्रैल को 11.58 सुबह