हरिद्वार। गन्ने का स्वाद चखने आया हाथियों का झुंड जंगल लौटने की बजाए खेत में ही फंस गया। खेतों में पहुंचे लोगों ने हाथी होने की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची वन टीम ने हाथियों की खेत में ही घेराबंदी कर ली। अंधेरा होने पर उन्हें जंगल में खदेड़ा गया।
किसानों के खेतों में गन्ने की फसल पककर तैयार हो चुकी है। किसानों की ओर से गन्ने को काटना भी शुरू कर दिया है, लेकिन जब गन्ने की फसल पककर तैयार हो जाती है तो हाथियों का मूवमेंट भी ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ जाता है, क्योंकि, हाथी किसानों के खेतों में खड़े गन्ने को खाने आते हैं, लेकिन सुबह निकलने से पहले ही जंगल में लौट जाते हैं।
रविवार की रात में भी हाथियों का एक झुंड गाड़ोवाली गांव के गन्ने के खेतों में आया हुआ था, मगर हाथी गन्ने के स्वाद में इतना मशगूल हो गया कि वह यही भूल गए कि अब दिन निकल गया है, पर सुबह जब किसान अपने खेतों में कार्य करने के लिए पहुंचे तो उनके हाथी देखकर होश उड़ गए। खेतों में हाथियों का झुंड होने की सूचना किसानों की ओर से वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की खेत पर पहुंची। जिसने खेत को चारों ओर से घेर लिया, ताकि हाथी दिन में हाथी खेतों से बाहर नहीं निकल सके, क्योंकि, यदि हाथी दिन में बाहर निकल गए तो खेतों में काम रहे किसानों और ग्रामीणों काे नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए, वन विभाग की टीम की ओर से दिनभर हाथियों को खेतों से बाहर नहीं निकलने दिया। शाम को जब अंधेरा हुआ तो वन टीम की ओर से लोगों और हाथियों को सुरक्षित करते हुए जंगल में पहुंचाया गया। तब जाकर वन विभाग और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों ने किया हंगामा
हरिद्वार। ग्रामीणों की ओर से हाथियों के खेतों में आने पर जमकर हंगामा किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग की ओर से हाथियों की रोकथाम नहीं की जा रही है। जिससे उन्हें फसलों का नुकसान तो उठाना ही पड़ रहा है। जान-माल की हानि का अंदेशा भी बना रहता है। उन्होंने नष्ट गन्ने की फसल का मुआवजा मांगा। जिस पर वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया। कहा कि वन टीमों की ओर से हाथियों को रोकने के लिए बेहतर उपाय किए जाएंगे, वन टीमों की ओर से गश्त बढ़ाई जाएगी।
सुबह खेत में हाथी होने की सूचना मिली थी। जिस पर टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। हाथियों को अंधेरा होने पर जंगल में लौटा दिया गया है। वन टीमों को तैनात कर दिया गया, ताकि हाथी फिर से आबादी क्षेत्र में न आ सकें। प्रभावित किसानों को मुआवजा भी दिया जाएगा।
शैलेंद्र सिंह नेगी, रेंजर, हरिद्वार