रोशनाबाद। बिना ऋण राशि दिए एक किसान को लाखों रुपये की रिकवरी का नोटिस भेजना बैंक ऑफ इंडिया को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग हरिद्वार ने इसे बैंक की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए 5.69 लाख रुपये का रिकवरी नोटिस निरस्त कर दिया है। साथ ही बैंक पर जुर्माना भी लगाया है।
मामला लक्सर तहसील के मुंडाखेड़ा कला गांव निवासी किसान हरपाल से जुड़ा है। हरपाल ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि बैंक ऑफ इंडिया की पुरकाजी मुजफ्फरनगर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और एक अन्य व्यक्ति रामकुमार ने उसे पॉलीहाउस में फूलों की खेती के लिए लोन दिलाने का झांसा दिया था। 70 प्रतिशत सब्सिडी का लालच देकर उससे खसरा-खतौनी समेत कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। परिवार की असहमति के चलते उसने लोन लेने से मना कर दिया और बैंक से कोई धनराशि प्राप्त नहीं की। इसके बावजूद बैंक ने उस पर 5,69,346 रुपये (ब्याज सहित) की वसूली का नोटिस जारी कर दिया।
सुनवाई के दौरान बैंक ने दावा किया कि किसान की सहमति से 5 लाख रुपये की केसीसी लिमिट स्वीकृत की गई थी और 4.90 लाख रुपये तीसरे पक्ष (एक पौधशाला) को डिमांड ड्राफ्ट के जरिए दिए गए। हालांकि आयोग ने पाया कि बैंक की ओर से प्रस्तुत प्राधिकरण पत्र अधूरा था और उसमें किसी लाभार्थी का नाम तक दर्ज नहीं था। आयोग ने यह भी कहा कि बैंक यह साबित करने में विफल रहा कि ऋण राशि वास्तव में किसान या उसकी सहमति से किसी अन्य खाते में ट्रांसफर की गई।
आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डॉ. अमरेश रावत और सदस्य रंजना गोयल की पीठ ने 18 मार्च 2026 को निर्णय सुनाते हुए 5,69,346 रुपये का रिकवरी नोटिस निरस्त कर दिया। साथ ही बैंक को 45 दिनों के भीतर किसान को 15,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 8,000 रुपये वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए।
स्पष्ट किया गया कि निर्धारित समय में भुगतान न होने पर बैंक को इस राशि पर वाद दायर करने की तिथि से अंतिम भुगतान तक 10 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
अन्य किसानों को भी राहत
मामले में विपक्षी रामकुमार के खिलाफ परिवाद निरस्त कर दिया गया। आयोग के अनुसार, इसी तरह के अन्य मामलों में भी कई किसानों के खिलाफ बैंक की ओर से जारी रिकवरी नोटिस रद्द किए गए हैं, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।