अचानक पांच सौ और एक हजार के रुपये बंद होने से धर्मनगरी में अफरा-तफरी रही। नोट बंद होने से गुजरात के यात्री सीजन में ब्रेक लग गया। इससे यहां अस्थि प्रवाह और कर्मकांड करने आए यात्री काफी परेशान रहे। स्थिति यह रही कि पूजा सामग्री खरीदने के लिए भी छोटे नोट नहीं मिल पाए।
इन दिनों गुजराती यात्रियों की भारी भीड़ हरिद्वार में थी। सभी यात्री बड़े नोट लेकर यात्रा पर आए थे। मंगलवार की शाम से अचानक बड़े नोट बंद होने की घोषणा के बाद यात्री होटलों पर भोजन तक नहीं कर पाए। दुकानदारों ने बड़े नोट लेने से साफ मना कर दिया। गुजरातियों को लेकर सौ से अधिक बसें मंगलवार को हरिद्वार में थी। अब केवल तीन-चार बसें ही नजर आ रही हैं। गुजराती यात्री घरों की ओर रवाना हो गए हैं। रेलवे स्टेशनों पर बड़े नोटों का प्रचलन पूर्वाह्न 11 बजे तक बंद रहा। बाद में रेलवे मंत्रालय से निर्देश आने के बाद टिकट मिले, लेकिन पांच सौ से नीचे की धनराशि वालों से खुले नोट मांगे गए। परिणाम स्वरूप अनेक यात्री बिना टिकट के गाड़ी में सवार हो गए। हरिद्वार के रेस्त्राओं पर किसी ने भी पांच सौ का नोट नहीं लिया। शाम तक यात्री धर्मनगरी से निकल गए।
गंगा तटों पर कर्मकांड के लिए आने वाले यात्रियों को भी भारी कठिनाई हुई। पूजा और कर्मकांड के लिए सामग्री बेचने वाले दुकानदार छोटे नोटों की मांग कर रहे थे। गंगा के घाट पर पंड़ितों को देने के लिए कम ही यात्रियों के पास छोटे नोट उपलब्ध थे। अलबत्ता पुरोहितों ने यजमानों से बड़े नोट भी ले लिए। कई यात्री भोजन के लिए पंड़ों से छोटे नोट मांगते रहे। पुरोहितों का अनुमान है कि अब अगले कुछ दिनों तक यात्रियों की आमद कम रहेगी। जब तक बैंकों से लेनदेन विधिवत नहीं होता तब तक धर्मनगरी भी संकट बना रहेगा।