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भूस्खलन से बचाव के उपाय खोजेंगे

Thu, 20 Jun 2013 05:30 AM IST
Haridwar
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रुड़की। उत्तराखंड भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कहर से कराह रहा है। सूबे में हुए जबरदस्त भूस्खलन के कारण तमाम भवन और सड़कें ढह गई हैं। भविष्य में ऐसे हालात पैदा न हों इसके लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) भूस्खलन से बचने के उपाय खोज रहा है। ताकि भूस्खलन से होने वाले वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके।
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सीबीआरआई रुड़की ने ‘इनवेस्टिगेशन ऑफ लैंड स्लाइड’ प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट की मदद से ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है जहां पर भूस्खलन के मामले पिछले वर्षों में सबसे ज्यादा सामने आए हैं। पिछले कई सालों की बारिश का रिकार्ड भी जुटाया गया है। किस बारिश में कितना और कहां पर भूस्खलन हुआ है। साथ ही मिट्टी की भी जांच की जा रही है। किस स्थान पर मिट्टी मजबूत और किस स्थान पर कमजोर है, इसका पता लगाया जा रहा है। पांच साल के इस प्रोजेक्ट में इन सभी बातों का अध्ययन सीबीआरआई करेगा।
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उत्तरकाशी और जोशीमठ में हो रहा अध्ययन
‘इनवेस्टिगेशन ऑफ लैंड स्लाइड’ प्रोजेक्ट के शुरुआती दौर में अभी उत्तरकाशी और जोशीमठ के कुछ प्वाइंटों पर अध्ययन हो रहा है। वहां की मिट्टी की जांच की जा रही है ताकि भूस्खलन वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया जा सके।
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‘उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लैंड स्लाइड बड़ी समस्या है। मानसून के दिनों में होने वाली भारी बारिश के कारण लैंड स्लाइड होता है जिससे जानमाल का काफी नुकसान होता है। इसके लिए जरूरी है कि ऐसे स्थानों को चिह्नित किया जाए जहां पर यह समस्या ज्यादा होती है। निर्माण कार्य भी इसी को देखते हुए किया जाए। इसको देखते हुए ही प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें पिछले कई वर्षों के बारिश के डेटा को कलेक्ट किया गया। मिट्टी की जांच की जा रही है। कौन सा स्थान निर्माण के लिए उपयुक्त है। इसका अध्ययन किया जा रहा है।
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-श्रीमान कुमार भट्टाचार्य, निदेशक, सीबीआरआई रुड़की।
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