अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। गंगा रक्षा के लिए आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रो. जीडी अग्रवाल ने गंगा की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि साधारण कानूनों से गंगा का भला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांग मान लेती है तो वे अनशन समाप्त कर देंगे। ऐसा नहीं होने पर वह गंगा के लिए प्राणों की आहूति देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
बृहस्पतिवार को स्वामी सानंद ने पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती की ओर से उन्हें पत्र भेजकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया गया है। दोनों मंत्रियों ने उन्हें गंगा के लिए केंद्र सरकार की ओर से कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया गया है। लेकिन उन्होंने गंगा की अविरलता के लिए कोई ठोस बात नहीं कही है। स्वामी सदानंद ने कहा कि गंगा के लिए विशेष कानून बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 18 जुुलाई से होने वाली संसद सत्र में गंगा के लिए विशेष कानून बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत को एक मसौदा भेजा था। सरकार को चाहिए कि मौजूदा परिस्थिति में इस मसौदे में ही परिवर्तन करके नए प्रावधान बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार करीब बीस हजार करोड़ रुपये की लागत से गंगा के किनारे शहरों में सुविधाएं जुटा रही है, लेकिन गंगा के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
इस अवसर पर मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा कि सरकार नमामि गंगे के तहत एसटीपी लांट और घाट आदि बनाने का दावा कर रही है, लेकिन गंगा की बेहतरी के लिए कोई नहीं सोच रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता तभी हो सकती है, जब उसकी धारा को मुक्त किया जाए।
गंगा रक्षा के लिए स्वामी सानंद के अनशन के 14वें दिन बृहस्पतिवार को मेडिकल टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। उनका वजन करीब एक किग्रा कम पाया गया। बृहस्पतिवार को कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज, सुमित तिवारी और व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संजीव चौधरी आदि ने मातृसदन पहुंचकर स्वामी सानंद के अनशन को समर्थन दिया।
गंगा पर चिंता के लिए आज से जुटेंगे विशेषज्ञ
हरिद्वार। मातृसदन में जलपुरुष राजेंद्र सिंह के संयोजन में शुक्रवार से दो दिवसीय कार्यशाला होगी। दो दिन तक चलने वाली कार्यशाला में गंगा रक्षा के लिए देशभर से जुटने वाले विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
मातृसदन मं पत्रकार वार्ता में जलपुरुष रापजेंद्र सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, केरल समेत विभिन्न राज्यों से गंगा प्रेमी और पर्यावरण विद्वान लेंगे। उन्होंने कहा कि गंगा के लिए स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के अनशन को समर्थन देने की रणनीति भी बनाई जाएगी। उन्होंने मोदी सरकार को गंगा के प्रति उदासीन बताया। नमामि गंगा योजना बनने से उम्मीद थी कि गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए अब तेजी से काम किया जाएगा, लेकिन परियोजना में ऐसा कोई काम ही नहीं किया जा रहा है जो गंगा का भला कर सके। उन्होंने बताया कि दो दिन की कार्यशाला में गंगा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।