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न पारदर्शिता और न भ्रष्टाचार पर अंकुश

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निकायों में एलईडी लाइट सहित विद्युत उपकरणों की खरीद में घोटाले की दो स्तरीय जांच के डेढ़ वर्ष बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ने नाराजगी जताई है।
जांच में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं उजागर होने के बाद भी दोषियों के विरु कार्रवाई नहीं होने संबंधी द्वितीय अपील के निस्तारण आदेश में सीआईसी ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। प्रकरण में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है। कहा कि भ्रष्टाचार के प्रकरणों में पूरी तत्परता के साथ त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। सात मई को जारी आदेश में सीआईसी शत्रुघ्न सिंह ने सचिव शहरी विकास से अपेक्षा की है कि वे प्रकरण से संबंधित सभी अभिलेखों का स्वयं अध्ययन कर समुचित कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर अपीलार्थी एवं आयोग को सूचित करें। गौरतलब है कि हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व ऊधमसिंहनगर जिलों के नगर निगमों, नगरपालिका परिषदों व नगर पंचायतों एलईडी लाइटों तथा अन्य विद्युत उपकरणों की खरीद के संबंध में सूचना अधिकार में प्राप्त जानकारी से बड़ा भ्रष्टाचार होना पाया गया था। शासन की ओर से गठित जांच समिति ने तत्कालीन निदेशक शहरी विकास ने 23 नवंबर 2016 को निकायों के अधिकारियों से धन की वसूली करने के साथ ही कारण बताओ नोटिस जारी किया था, परंतु कार्रवाई इससे आगे नहीं बढ़ पाई।
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मंत्री ने भी कराई जांच पर नतीजा शून्य
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी भ्रष्टाचार के प्रकरण की एमडीडीए उपाध्यक्ष से जांच कराई। शासन स्तर पर दोनों जांच उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मंगलवार 15 मई को फिर दोहराया था कि भ्रष्टाचार के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, परंतु अब तक उन्होंने किया कुछ नहीं है।
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