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धर्मशालाओं पर करारोपण का अभियान शुरू

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम के कर एवं राजस्व विभाग ने शुक्रवार से टैक्स लगाने का अभियान शुरू कर दिया है। इससे नगर निगम की आय में एक करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि होने का अनुमान हैं। नगर निगम क्षेत्र में 279 धर्मशालाएं की नगर निगम से लाइसेंस लेकर संचालित हो रही हैं। इन धर्मशालाओं के यात्रियों के ठहरने वाले कमरों पर आवासीय दर से करारोपण किया जाना है। इसके साथ ही धर्मशालाओं में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बैंक, दुकान, एटीएम, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर व्यावसायिक दर से संपत्ति कर निर्धारित होना है।
धर्मशालाओं पर आवासीय या व्यावसायिक दर पर टैक्स लगाने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। शासन ने संपत्तिकर नियमावली में संशोधन कर विवाद का पटाक्षेप किया है। तीन मई को अपर सचिव भूपाल सिंह मनराल के हस्ताक्षर से जारी संशोधित नियमावली के बाद सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल ने कर एवं राजस्व अधीक्षकों की बैठक कर धर्मशालाओं पर करारोपण का अभियान चलाने के निर्देश दिए। नियमावली के अनुसार यात्रियों के उपयोग वाले भाग पर प्रतिवर्ग फीट की आवासीय दर से टैक्स लगेगा। जबकि व्यावसायिक भाग पर आवासीय दर के तीन गुना अधिक दर से करारोपण होगा।
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धर्मशालाओं पर कर निर्धारण का फार्मूला निर्धारित होने से नगर निगम की आय में एक करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोत्तरी होगी।

आवासीय फ्लैटों पर भी लगेगा कर
अखाड़ों के अंदर बनाए गए आवासीय फ्लैटों पर भी करारोपण किया जाएगा। आश्रम, धर्मशाला व अखाड़ों की वह संपत्ति कर मुक्त की गई है जो धार्मिक कार्यों, पूजा स्थल, भजन-कीर्तन तथा साधु-संतों व आश्रम कर्मियों के निवास के काम आती है।
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गैर लाइसेंसी धर्मशालाओं पर कसेगा शिकंजा
नगर निगम क्षेत्र में एक सौ से अधिक धर्मशालाएं तथा लॉज बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। धर्मशाला का बोर्ड टांग कर होटलों से भी महंगे कमरों वाली धर्मशालाओं पर कोई भी नियम लागू नहीं है। होटलनुमा धर्मशालाओं के अंदर रेस्टोरेंट भी चल रहे हैं। अब करारोपण की नियमावली आने के बाद नगर निगम का कर एवं राजस्व विभाग उन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है।
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