ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी आखिर समाज कल्याण विभाग पर कब शिकंजा सकेगी। यह सवाल रह रह कर खड़ा हो रहा है। अब तक दो कॉलेज निदेशकों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन इस पूरे घोटाले में लिप्त सबसे जिम्मेदार महकमे के किसी भी अधिकारी व कर्मचारी से पूछताछ न होने पर एसआईटी की पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।
जिले के सौ से अधिक निजी शिक्षण संस्थान एसआईटी की रडार पर हैं। दो कॉलेजों के निदेशक अंकुर शर्मा और ओम त्यागी की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब तक करीब बीस करोड़ के घोटाले का सच सामने आ चुका है। पूरे जिले भर के निजी शिक्षण संस्थान कितनी रकम डकार गए, इसकी जांच में अभी एसआईटी जुटी ही है। इस सबके बीच बड़ी बात ये है कि एसआईटी ने छात्रवृत्ति वितरण में समाज कल्याण विभाग पर शिकंजा अब तक क्यों नहीं कसा जा सका है।
साफ है कि इस घोटाले की नींव समाज कल्याण विभाग ने ही रखी है, लेकिन तब भी एसआईटी सीधे हाथ डालने से क्यों बच रही है। गिरफ्तारी की बात दूर एसआईटी ने इस महकमे के अधिकारियों कर्मचारियों से पूछताछ करने तक ही हिम्मत नहीं जुटाई कि आखिर इतनी बड़ी रकम बांट देने का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। एसआईटी के टॉरगेट पर निजी शिक्षण संस्थान है ही लेकिन उन्हें रकम बांट देने वाले महकमे पर मेहरबानी की वजह भी चर्चा बनी हुई है। पुलिस के आला अफसर भी इस महत्वपूर्ण सवाल पर टाल मटोल कर जाते हैं। एसआईटी प्रभारी एसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि मामले की सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पुख्ता तथ्य आते ही समाज कल्याण विभाग के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।