ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
दूसरी बार भी फूल-फरोसी का ठेका नहीं होने से नगर निगम को प्रतिदिन लगभग 47 हजार रुपये की चपत लग रही है। फिलहाल कोई नया ठेकेदार फूल-फरोसी का ठेका लेने को तैयार नहीं हुआ है। जबकि पुराने ठेकेदार गंगाघाटों पर अपनी शर्तों के अनुसार ठेका लेना लेना चाहते हैं। ऐसे में पुराने ठेकेदार के वेंडर ही नगर निगम को राजस्व दिए बिना घाटों पर फूल-फरोसी का धंधा कर रहे हैं।
नगर निगम में बृहस्पतिवार को फूल-फरोसी का ठेका दूसरी बार भी नहीं हो पाया है। कोई नया ठेकेदार ठेका लेने को तैयार नहीं है। जबकि पुराने ठेकेदार अपनी शर्तों पर ठेका लेना चाहते हैं। दरसअल, राजनीतिक रसूख वाला ठेकेदार फूलों के साथ प्लास्टिक कैनियों के साथ प्रसाद आदि सामग्री बेचने की भी आजादी चाहते हैं। इसके बिना वह केवल फूलों का ठेका लेने को तैयार नहीं है। जबकि हरकी पैड़ी क्षेत्र तथा गंगाघाटों पर पॉलिथीन, प्लास्टिक कैनी आदि सामान को बेचने खरीदने तथा उपयोग करने पर एनजीटी और हाईकोर्ट ने प्रतिबंध लगा रखा है। नगर निगम ने हरकी पैड़ी क्षेत्र सहित 23 महत्वपूर्ण गंगाघाटों का वित्तीय वर्ष 2018 का ठेका 1.74 करोड़ रुपये में दिया था, जिसकी अवधि 31 जनवरी को समाप्त हो चुकी है। अवधि समाप्त होने के बावजूद ठेकेदार का धंधा तो बादस्तुर चल रहा है, परंतु नगर निगम का राजस्व ठप हो गया है। ऐसे में नगर निगम को हर दिन 47 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि ये स्थिति पहले भी बन चुकी है, लेकिन तब नगर निगम प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नया ठेका होने तक पुराने ठेके के आधार पर ही दैनिक वसूली करता था। मगर इस बार कुछ सत्ताधारियों के चलते नगर निगम ठेके की रकम तक वसूल नहीं कर पा रहा है। अपर नगर आयुक्त नुपूर वर्मा ने बताया कि जल्दी ही फिर से ठेका देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जब तक ठेका नहीं होता गंगाघाटों पर अवैध रूप से फूल-फरोसी का कारोबार नहीं करने दिया जाएगा।