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मुकदमा तो लिखा, अब विवेचना को लेकर पशोपेश में पुलिस

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में अपात्रों को ऋण देने के मामले दर्ज हुए मुकदमे की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी से कराई जाएगी। यह निर्णय एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी ने लिया है।
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मालूम हो कि वर्ष 2003-04 से 2011 के बीच में योजना के तहत कई लोगों को ऋण दिया गया था। सूचना के अधिकार में इस बात का खुलासा हुआ था कि अधिकारियों ने मानकों का उल्लंघन करके कई अपात्रों को करोड़ों रुपये का ऋण दे दिया। इस मामले में अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। 19 जनवरी को प्रथम अपर सिविल जल (एसडी) ने सिडकुल पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेश पर शुक्रवार को सिडकुल पुलिस ने तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी सहित कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अधिकारियों के अलावा ऋण लेने वाले राजनीतिक और रसूखदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपी अधिकारियों में से कई इस समय सचिवालय में बड़े पदों पर तैनात हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इसकी जांच करना मुश्किल हो रहा था। क्योंकि इन अधिकारियों तक पहुंचना सामान्य पुलिस के बस का नहीं। इसलिए पुलिस ने इसकी जांच किसी राजपत्रित अधिकारी से कराने का निर्णय लिया। एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी ने बताया कि मुकदमा दर्ज करने के बाद सभी पहलुओं को देखा जा रहा है। इस मामले की जांच थाने के बजाय राजपत्रित अधिकारी से कराई जाएगी। जांच कौन करेंगे इस बारे में अभी आदेश नहीं किया गया है।
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