हरिद्वार। उत्तर प्रदेश से पृथक राज्य उत्तराखंड गठन के समय भगवानपुर तहसील के ग्राम खजूरी निवासी उपभोक्ता ने बकाया मूल्य के साथ अन्य शुल्क जमा करते हुए विद्युत कनेक्शन कटवा दिया था। इसके साक्ष्य और रसीद होने के बावजूद उत्तराखंड पावर कारपोरशन लिमिटेड ने 17 वर्ष बाद उपभोक्ता को 22 दिसंबर 2020 को 1,67,275 रुपये का बकाया नोटिस थमा दिया गया। मामले में उपभोक्ता ने फोरम में वाद दायर किया।
वाद की सुनवाई करते हुए अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य डाॅ. अमरेश रावत ने इतने वर्ष बाद नोटिस देने को गलत बताया। वहीं फोरम की पीठ ने परिवादी को हुए मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
दायर प्रकरण के अनुसार वादी प्रमोद कुमार निवासी खजूरी का कहना है कि उत्तराखंड राज्य अलग होने से पहले उनका गांव सहारनपुर जनपद उत्तर प्रदेश का भू भाग था। राज्य गठन के बाद वर्ष 4 दिसंबर 2003 को उन्होंने विद्युत कनेक्शन के स्थायी विच्छेदन के लिए अंतिम बिल 6,233 रुपये जमा कर दिए। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड रुड़की ने इसकी स्वीकृति भी दी थी।
करीब 17 वर्ष बीत जाने के बाद 22 दिसंबर 2020 को उन्हें 1,67,275 रुपये बकाया दर्शाते हुए निगम ने डिमांड नोटिस थमा दिया। धनराशि की वसूली भू राजस्व के बकाया के रूप में करने की चेतावनी पर उसने उपभोक्ता संरक्षण आयोग में अपील की। उन्होंने नोटिस भेजने से स्वयं और परिवार को मानसिक व शारीरिक रूप से क्षति होने और वाद व्यय के रूप में क्षतिपूर्ति की मांग की थी। उपभोक्ता ने कनेक्शन विच्छेदन के प्रपत्र और बिल की धनराशि जमा करने का पावती आदि भी प्रस्तुत किया। अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता ने इस पर कड़ी टिप्प्णी की। उन्होंने न केवल नोटिस को 17 वर्ष बाद भेजने की कार्यवाही को गलत माना और शारीरिक मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये जमा करने के आदेश दिए।