अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्रों की ओर से की गई रैगिंग की सभी शिकायतें एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में झूठी और निराधार पाई गई। ऐसे में शिकायतकर्ता छात्रों के भविष्य और छात्रों की ओर से पहली बार की गई इस तरह की शिकायत को ध्यान में रखते हुए चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।
उत्तराखंड संस्कृत विवि में एमए द्वितीय वर्ष के छात्र मोहित शर्मा, एमए योग प्रथम वर्ष के छात्र शुभम झा ने पीजी डिप्लोमा योग के छात्र विकास जोशी के खिलाफ रैगिंग की शिकायत दी थी। वहीं, बीए द्वितीय वर्ष प्रतीक शर्मा ने एमए द्वितीय के छात्र मोहित शर्मा, अनूप बहुखंडी, शिवचरण नौडियाल, ललित शर्मा पीएचडी के छात्र, शुभम झा एमए प्रथम वर्ष के छात्र, चेतन शर्मा एमए द्वितीय वर्ष, धीरज सिंह एमए द्वितीय वर्ष और आशीष पोखरियाल एमए द्वितीय वर्ष के छात्र के खिलाफ रैगिंग की शिकायत की थी। विश्वविद्यालय स्तर पर रैगिंग की शिकायतों पर कोई कार्यवाई नहीं करने पर छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन में शिकायत की। मामले को बढ़ता देख विवि की एंटी रैगिंग कमेटी ने शिकायतों की जांच की। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि छात्रों की शिकायतें प्रथमदृष्ट्या रैगिंग का नहीं है। सितंबर 2017 में विवि में हुए छात्रसंघ चुनाव में हार-जीत के बार छात्रों के दो गुटों की ओर से एक-दूसरे पर रैगिंग की झूठी और निराधार शिकायत की गई। जबकि विवि में रैगिंग जैसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। छात्रों ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए एक-दूसरे की शिकायतें विश्वविद्यालय प्रशासन से की। रिपोर्ट में शिकायतकर्ता छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। कहा गया कि भविष्य में इस तरह की झूठी शिकायतें करने पर छात्रों को कक्षा से वंचित करने अथवा निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है।