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11 साल का छात्र बना नौ बच्चों का ‘फरिश्ता’

Fri, 15 Feb 2013 01:12 PM IST
लक्सर(हरिद्वार)/ब्यूरो
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बच्चों को स्कूल लेकर आ रही बस बृहस्पतिवार सुबह अनियंत्रित होकर पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। इस हादसे में दो बच्चों की मौत हो गई। लेकिन एक बच्चा अपने नौ साथियों के लिए फरिश्ता साबित हुआ।
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सेंट जेपी कान्वेंट पब्लिक स्कूल के छात्र कमल ने हादसे के बाद धैर्य के साथ एक-एक कर नौ बच्चों को बाहर निकाला। 11 वर्षीय कमल को अपने दो साथियों को न बचा पाने का मलाल है।

बृहस्पतिवार सुबह निरंजनपुर के पास जैसे ही स्कूली बस दुर्घटनाग्रस्त हुई चालक मौके से फरार हो गया। आसपास बच्चों को बचाने वाला कोई नहीं था। ऐसे में गंगदासपुर निवासी रमेश चंद के बेटे कमल (कक्षा तीन) ने साहस दिखाया। खुद घायल होने के बाद भी बिना घबराए उसने दूसरे साथियों को बस से बाहर निकालने का निर्णय लिया।
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सभी बच्चे बस के अंदर पानी में फंसे हुए थे। कमल ने एक-एक कर सभी नौ बच्चों को किसी तरह बाहर निकाला। इनमें से कुछ बच्चों के पेट में पानी भर चुका था। बाद में ग्रामीणों ने बच्चों का प्राथमिक इलाज किया। कमल के साहस की ग्रामीणों के साथ अधिकारियों ने भी प्रशंसा की है। कमल के पिता रमेश चंद और माता अंगूरी देवी भी बेटे के इस साहस से बेहद खुश हैं।

सुल्तानपुर स्थित सेंट जेपी कान्वेंट पब्लिक स्कूल की यह बस रायसी क्षेत्र के निरंजनपुर, महाराजपुर, गंगादासपुर गांवों के बच्चों को लेने के लिए गई थी। इन गांवों से 12 बच्चे बस में सवार होकर स्कूल आ रहे थे। सुबह आठ बजे बस जैसे ही निरंजनपुर गांव पहुंची अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरी। बस गड्ढे में गिरते ही चालक सुनील मौके से फरार हो गया और बच्चों में चीखपुकार मच गई। हादसे में सात वर्षीय राधिका और पांच वर्षीय देवांश (दोनों निवासी महाराजपुर) की मौत हो गई। पुलिस ने फरार बस चालक सुनील को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

चालक फरार न होता तो बच सकती थी जान
दुर्घटना के बाद अगर चालक मौके से फरार नहीं होता तो शायद दोनों बच्चों की जान बच जाती। बस जिस जगह गिरी वहां पानी भरा हुआ था, जिस कारण बस में भी खिड़कियों से पानी घुसने लगा था। दुर्घटना में बच्चों को ज्यादा चोट नहीं आई थी। माना जा रहा है कि पानी में दम घुटने से दोनों मासूमों की मौत हुई है। उनके शरीर पर ज्यादा चोट के निशान नहीं थे। जब तक दोनों बच्चों को बाहर निकाला गया उनकी मौत हो चुकी थी। ऐसे में अगर बस चालक फरार होने की बजाय बच्चों को बाहर निकालने में जुट जाता तो बच्चों की जान बच सकती थी।
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