चार धाम यात्रा की तैयारी में उलझी सरकार को पुनर्वास के लिए समय ही नहीं मिल पा रहा है। यात्रा की तैयारी के अलावा अब 2014 का चुनाव भी कांग्रेस को ललचा रहा है।
ऐसे में पुनर्वास को लेकर असंतोष लगातार सुलग रहा है। मंगलवार को आपदा प्रभावित अगत्स्यमुनि और देहरादून में एक ही दिन अलग-अलग तरीके से पुनर्वास और विस्थापन की ठोस नीति की मांग उठी।
गैर सरकारी संगठन सामने आए
अगस्त्यमुनि में राजनीतिक और गैर राजनीतिक लोगों ने यह मुहिम छेड़ी तो दून में गैर सरकारी संगठन सामने आए। अब यह अभियान मुंबई में भी प्रवासियों के बीच छेड़ा जाएगा। राज्य सरकार का हाल यह है कि चार साल पहले अति संवेदनशील घोषित किए गए 233 गांवों के विस्थापन का मुद्दा अभी तक हल नहीं हो पाया है।
16-17 जून को आए जल प्रलय के बाद यह सूची 400 तक जा पहुंची है, लेकिन हर साल आपदा की मार सहने वाले गांवों में से एक का भी पुनर्वास नहीं हुआ है। यहां तक कि इन गांवों का सर्वे तक नहीं कराया गया है।
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इसमें गोंदार, चोमासी जैसे गांव भी हैं जो चारों ओर से वन संरक्षित क्षेत्र से घिरे हुए हैं और उनके विस्थापन का मसला बिल्कुल अलग तरीके से हल की मांग कर रहा है। आपदा को गुजरे हुए सौ से अधिक दिन बीत चुके हैं, पर सरकार भूमि का मसला ही हल नहीं कर पाई है।
सुरक्षित जमीन होती तो विस्थापित हो गए होते
सरकार ने इस बीच पहाड़ के गांवों को पहाड़ में ही बसाने की बात की पर इस मामले में भी एक कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। पुरानी पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित लोगों से ही कहा जा रहा है कि जमीन बताएं कि कहां विस्थापित हो सकते हैं। गोंदार के प्रधान भगत सिंह पंवार का कहना है कि गांव के लोगों के पास सुरक्षित जमीन होती तो खुद ही विस्थापित हो गए होते।
इसी तरह चमोली में भ्युंदार, पुलना जैसे गांव के लोग विस्थापन और पुनर्वास का मसला हल न होने के कारण जोशीमठ के यूथ हास्टल में परिवार सहित रहने को विवश हैं। भ्युंदार के ही करीब 99 परिवार कुछ कमरों के परिवार में गुजर बसर कर रहे हैं। आपदा के सौ दिन बीत जाने के बाद भी इनकी स्थिति जस की तस है।
हस्ताक्षर अभियान छेड़ा
अब आपदा प्रभावित लोगों का भी धीरज जवाब दे रहा है। मंगलवार को केदार घाटी पुनर्वास संघर्ष समिति ने हस्ताक्षर अभियान छेड़ा। समिति पदाधिकारियों के मुताबिक दस अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। मुंबई में भी यह अभियान चलाया जाएगा। अगत्स्यमुनि में टेंट में चल रहे स्कूल के बच्चों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। वहीं, दून के गांधी पार्क में कई संगठनों ने हस्ताक्षर अभियान छेड़ा।
इनकी मांग थी कि सरकार जल्द से जल्द पुनर्वास और विस्थापन पर स्थिति स्पष्ट करे। रचना संगठन के मदन मोहन डोभाल के मुताबिक पुनर्वास के लिए पूर्व में बनाई गई नीति व्यवहारिक नहीं है। चार साल पहले नीति बनाई गई थी, पर 233 गांवों में से एक का भी विस्थापन नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि अभियान के बैनर पर करीब एक हजार लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा। हस्ताक्षर अभियान में संवेदी संगठन के डॉ. किशोर नौटियाल, विपरो से सुबोध ढोंडियाल आदि शामिल थे।
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