हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध गढ़वाल मंडल के सरकारी कॉलेजों का नाता जल्द ही विवि से टूटने वाला है। इसकी प्रक्रिया शासन स्तर पर शुरू हो चुकी है। गढ़वाल विवि पहले ही अपनी अकादमिक परिषद की बैठक में इन कॉलेजों के डिएफिलिएशन पर एनओसी दे चुका है।
गढ़वाल विवि को वर्ष 2009 में केंद्रीय विवि का दर्जा मिला था। उस वक्त एक्ट में प्रावधान था कि केंद्रीय विवि बनने के दिन तक जो कॉलेज, विवि से जिस तरह से संबद्ध थे, वैसे ही बने रहेंगे। कॉलेज चाहें तो अपने स्तर से असंबद्धता के लिए आवेदन कर सकते हैं। तब से लेकर सात साल बीत गए लेकिन कोई कॉलेज गढ़वाल विवि से अलग नहीं हुआ। इस बीच, प्रदेश के मेडिकल व आयुर्वेदिक कॉलेज जरूर गढ़वाल विवि से हटकर दूसरे विश्वविद्यालयों से संबद्ध हो गए।
बीते दिनों हरीश रावत सरकार की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र भेजा गया। यह पत्र मंत्रालय ने गढ़वाल विवि को अग्रसारित कर दिया था। इस आधार पर गढ़वाल विवि ने अपनी अकादमिक परिषद की बैठक में असंबद्धता को एनओसी दे दी। अब मामला शासन में लटका हुआ था। दो दिन पहले ही राजभवन से प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसके तहत पहले चरण में गढ़वाल मंडल के केंद्रीय विवि से संबद्ध सरकारी डिग्री कॉलेजों को असंबद्ध किया जा रहा है। वहां से असंबद्ध होते ही इन कॉलेजों को सीधे श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि से संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि नए सत्र 2016-17 में सभी सरकारी कॉलेज श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध होंगे।
श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा. यूएस रावत ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि वह इस नई जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। बता दें डा. रावत पूर्व में भी गढ़वाल विवि में बतौर कुलसचिव इन कॉलेजों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
51 कॉलेज हैं सरकारी
गढ़वाल विवि से इस वक्त गढ़वाल मंडल के 51 सरकारी कॉलेज संबद्ध हैं। इन कॉलेजों में करीब एक लाख छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत इन कॉलेजों को श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध किया जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि इन कॉलेजों की पूरी प्रक्रिया पूर्ण रूप से राज्य सरकार के अधीन हो जाएगी। राज्य के विवि से संबद्ध होने के बाद कई और पैमानों पर बेहतर परिणाम होगा।
यह था पेच
गढ़वाल केंद्रीय विवि के एक्ट में प्रावधान था कि जबर्दस्ती विवि किसी भी कॉलेज को असंबद्ध नहीं कर सकता है। कॉलेज खुद असंबद्ध होना नहीं चाहते। मामला कई बार एमएचआरडी को जा चुका है। चूंकि सरकारी कॉलेज, सरकार की संपत्ति हैं, लिहाजा विशेषज्ञों के मुताबिक उन्हें असंबद्ध करने में कोई परेशानी नहीं होगी। प्राइवेट कॉलेजों की संबद्धता फिलहाल जारी रहेगी।