सात हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित हरियाली कांठा के जंगलों तक पहुंची आग। घने जंगल के बीच में उठ रहा धुंआ।
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जिला मुख्यालय से लगे रुद्रप्रयाग रेंज से लेकर सभी पांच रेंजों के अधिकांश जंगल इन दिनों आग की चपेट में हैं। स्थिति यह है कि वनाग्नि सात हजार फीट की ऊंचाई पर स्थिति हरियाली-कांठा के घने बांज-बुरांश के जंगलों तक भी पहुंच गई है।
एक सप्ताह से रुद्रप्रयाग और पश्चिमी और पूर्वी जखोली रेंज के जंगल धू-धूकर जल रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर से धनपुर पट्टी के जसोली क्षेत्र के सबसे ऊंचाई वाले जंगल में भी धुएं का गुबार उठ रहा है। यह सघन वन क्षेत्र है।
शिकारियों द्वारा आग लगाने की संभावना
यहां ग्रामीणों की आवाजाही बहुत कम होती है। ऐसे में लोगों ने इन जंगलों में अवैध शिकार करने वाले शिकारियों द्वारा आग लगाने की संभावना जताई है।
दूसरी तरफ बिलोटा, बौंठा, तूना सहित रूंगसी, गिवाला, तलसारी, कमसाल, स्यूंर, शिशौ और मेदरपुर और सेम गांव के जंगलों में आग से लाखों की वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है।
नवासी के जंगल दो दिन से हो रहे राख, धुएं से बढ़ी तपन
आग
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उधर, पट्टी बच्छणस्यूं के ग्राम पंचायत नवासू के जंगल भी दो दिन से वनाग्नि से राख हो रहे हैं। वनाग्नि से पूरे वातावरण में गहरी धुंध छाने से तपन बढ़ गई है। इस समस्या से लोगों को आंखों में जलन, खुजली, सिरदर्द की समस्या हो रही है।
फायर सीजन में जिले में अब तक 13 हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर राख हो चुके हैं। कई स्थानों पर तो दो से तीन बार आग लग चुकी है।
वनाग्नि से बन रहे खतरनाक रसायन
वनाग्नि की चपेट में आ रहे पेड़-पौधे के जलने से खतरनाक रसायन वातावरण में घुल रहे हैं। एक तरफ जहां पानी के स्रोतों पर जली वनस्पति और पेड़ों की राख व मिट्टी गिर रही है, वहीं पेड़-पौधों के निकलने वाले एंजाएम और गोंद के जलने से कार्बन डाइक्साइड और कार्बन मोनाक्साइड सहित अन्य गैंसों की मात्रा भी बढ़ रही है। इनके वातावरण में घुलने से स्वासस्थ्य संबंधित मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
लगातार गश्त के बाद भी अराजक तत्व वनाग्नि की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जितना हो सकता है, उससे अधिक प्रयास किए जा रहे हैं कि आग से कम से कम नुकसान हो।
- राजीव धीमान, डीएफओ रुद्रप्रयाग वन प्रभाग