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बेटी जन्मने के बाद भी रहा आंचल खाली

Sun, 28 Jul 2013 01:08 PM IST
देवाल/यशवंत बडियारी
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उत्तराखंड आपदा अपने साथ कई गहरे दर्द देती जा रही है। मौत का सैलाब आए हुए भले ही एक महीना बीत गया है लेकिन पहाड़वासियों को हर रोज दर्द मिल रहा है।
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पहाड़ों का जीवन पहाड़ जैसा कठिन है। सड़कें बनी तो मुश्किलें कुछ कम हुई। लेकिन इस बार आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। सड़कें ही नहीं टूटी, बल्कि जैसे जीवन की डोर टूट गई।

देवसारी निवासी भावना के साथ तो कुछ ऐसा ही हुआ। उसे मातृत्व सुख मिलने के बाद भी वह उससे वंचित हो गई। कारण नवजात बच्ची का कुछ ही घंटों बाद मौत होना है।

सरकार प्रसूताओं को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए हेलीकाप्टर सुविधा देने की बात जरूर कर रही है, लेकिन तमाम हिस्सों में हालात काफी जटिल हैं। भावना को अस्पताल पहुंचने के लिए कई नदी-नाले पार करने पड़े। ऐसा नहीं होता तो शायद उसे अपनी बच्ची किलकारी सुनाई देती।
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गुरुवार को देवसारी निवासी भावना (22) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसका पति मनोज और अन्य परिजन उसे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल लाए। यहां डाक्टर ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।

सड़कें टूटी थी, तो परिजन उसे डंडी से नंदकेशरी तक ले गए। यहां पर सड़क पांच दिन से बंद थी जिससे अल्मोड़ा पहुंचाने में एक बार फिर दिक्कत सामने थी।

दर्द से कराहती भावना को चट्टानी रास्ते स्वयं ही पार कर दूसरे छोर पर पहुंचना पड़ा जिससे उसकी स्थिति और भी खराब हो गई। येन-केन देर शाम परिजन उसे लेकर अल्मोड़ा बेस अस्पताल पहुंचे। भावना की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसका ऑपरेशन किया गया।
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उसने बच्ची को जन्म दिया। अभी वह अपनी खुशी बांट भी नहीं पाए थे कि कुछ ही घंटे में नवजात बालिका ने दम तोड़ दिया। प्रसूता की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल के चिकित्साधीक्षक डा. नरेश कुमार का कहना है कि प्रसव से संबंधित तीन मामले और हैं, जिन्हें अन्यत्र रेफर किया गया है।
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