गेहूं की कटाई और धान की बुआई के बीच खेतों को दो से ढाई महीने तक खाली रखने की बाध्यता से किसानों को मुक्ति मिल सकती है।
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने इस अवधि के लिए उड़द और मूंग की नई प्रजातियों के बीज पेश किए हैं। इनसे सामान्य फसल के मुकाबले तीन गुना अधिक तक उत्पादन लिया जा सकता है।
गेहूं की फसल कटने के बाद धान लगाने से पहले किसान खेत खाली छोड़ देते हैं या अगली फसल से पहले खाद के तौर पर इस्तेमाल होने वाले ढेचा की बुआई कर दी जाती है।
31 नई प्रजातियां ईजाद
इस अवधि में कोई उत्पादन न मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। ऐसे में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने उड़द और मूंग की पंतनगर उड़द 35, पंतनगर मूंग 5 और पंतनगर उड़द 31 नई प्रजातियां ईजाद की हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सामान्यत: प्रति बीघा 40 किलो तक मूंग और उड़द का उत्पादन होता है। लेकिन नई प्रजातियों से एक क्विंटल से सवा क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। इसे उगाकर साल भर में किसान तीन फसलों गेहूं, धान और मूंग या उड़द का उत्पादन ले सकता है।
इनका कहनाः
परंपरागत फसलों से उत्पादन घटता जाता है। साथ ही फसलों में रोग फैलने की भी अधिक आशंका बनी रहती है। फसल चक्र में अलग फसल उगाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
- डा. वाईपीएस डबास, शिक्षा निदेशक प्रसार, पंतनगर विश्वविद्यालय
मूंग और उड़द की नई प्रजातियां दो से ढाई माह में तैयार हो जाती है। इसके उत्पादन से किसानों को लाभ होगा, वहीं इसकी पत्तियां भूमि की उर्वरा क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।
- डा. एसएस सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, ढकरानी