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गणेश चतुर्थी को इसलिए न करें चंद्रदर्शन

Sat, 07 Sep 2013 11:14 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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गणेश चतुर्थी के दिन भगवान विनायक का जन्मोत्सव शुरू हो जाएगा। यद्यपि चंद्रमा उनके पिता शिव के मस्तक पर विराजमान हैं, किंतु गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए।
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शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन चंद्रदर्शन से मनुष्य को निश्चय ही मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन श्रीकृष्ण ने चंद्रमा का दर्शन कर लिया।

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फलस्वरूप उन पर भी मणि चुराने का कलंक लगा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन किसी भी सूरत में चंद्रमा का दर्शन करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में इसे कलंक चतुर्थी भी कहा गया है।
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चंद्रदर्शन देता मिथ्या कलंक
जब श्री गणेश का जन्म हुआ, तब उनके गज बदन को देख कर चंद्रमा ने हंसी उड़ाई। क्रोध में गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दे दिया कि उस दिन से जो भी व्यक्ति चंद्रमा का दर्शन करेगा, उसे कलंक भोगने पड़ेंगे।

चंद्रमा के क्षमा याचना करने पर गणपति ने अपने शाप की अवधि घटाकर केवल अपने जन्मदिवस के लिए कर दी। फलस्वरूप यदि गलती से चंद्रमा का दर्शन गणेश चतुर्थी के दिन हो जाए तो गणेश सहस्त्रनाम का पाठ कर दोष निवारण करना चाहिए।
-प्रत्युष आत्रेय, ज्योतिषाचार्य

ज्येष्ठा नक्षत्र का चंद्रमा भी अशुभ
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वृश्चिक राशि का चंद्रमा यदि ज्येष्ठा नक्षत्र में आ जाए तो अशुभ माना जाता है। किंतु गणपति की बेडोल काया देख कर चंद्रमा उन पर हंसे थे, इसलिए श्रीगणेश ने उन्हें श्रापित कर दिया था।

गणपति के श्राप के कारण चतुर्थी का चंद्रमा दर्शनीय होने के बावजूद दर्शनीय नहीं है। गणेश ने कहा था कि इस दिन जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा, उसे कोई न कोई कलंक भुगतना पडे़गा। इस दिन यदि चंद्रदर्शन हो जाए, तो चांदी का चंद्रमा दान करना चाहिए।
- डा. प्रतीक मिश्रपुरी, अध्यक्ष, भारतीय विद्या सोसायटी

रात 8.56 तक रहेंगे चंद्रमा
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा रात 8.56 बजे तक विद्यमान रहेंगे। इसके बाद चंद्रदर्शन नहीं होगा। इस समय तक यदि दर्शन से बचा जाए तो कलंक से मुक्ति मिल सकती है।
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