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रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे लाखों परिवार

Tue, 02 Jul 2013 10:48 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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घाटियों में आसमान से बरसी आफत से चारधाम यात्रा रुक गई है। इससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी की जिलों में तो अर्थिक गतिविधियां ठप हुईं ही, ऋषिकेश, हरिद्वार और अन्य मैदानी जिलों में लोग प्रभावित हुए हैं।
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ठेली लगाने वालों से दुकानदारों, ट्रैवल एजेंटों, मंदिरों के पुरोहितों, वाहन चालकों, होटल, लॉज, धर्मशालाओं, रेस्टोरेंट के संचालकों तक की सालभर की कमाई इसी चारधाम यात्रा पर निर्भर रहती है।

आर्थिक गतिविधियां ठप
एक सर्वे के मुताबिक उत्तराखंड को पर्यटन से होने वाली आय में से अकेले चारधाम यात्रा का हिस्सा करीब 16 हजार करोड़ का है। अब तक चले यात्री सीजन में चार हजार करोड़ की कमाई मान भी ली जाए तो यात्रा रुकने से करीब 12 हजार करोड़ की आर्थिक गतिविधियां ठप होकर रह गई हैं।
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अगले साल भी अगर यात्रा एक तिहाई रह रह जाती है तो यह नुकसान 20 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा। ऐसे में कुल नुकसान करीब 32 हजार करोड़ के आसपास दिख रहा है। एक सर्वे के मुताबिक करीब छह लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चारधाम यात्रा मार्ग पर किसी न किसी रोजगार से जुड़े हैं।

आपदा से सभी प्रभावित
केदारनाथ और बदरीनाथ का दो हजार से ज्यादा पंडा-पुरोहित समाज, 12 हजार से ज्यादा कंडी, घोड़े-खच्चर से जुड़ा तबका, एक हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह ( मंदिर के लिए प्रसाद और यात्रियों के लिए सोवनियर बनाने वाले) इससे प्रभावित हैं। एक बड़ा वर्ग ट्रेवल एजेंटों और लॉज, होटल, रेस्ट्रोरेंट से जुड़ा है।

यात्रा पर आने वाले सबसे अधिक इसी पर खर्च करते हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, और पिथौरागढ़ में करीब ढाई हजार लोग पारिवारिक उद्योगों से जुड़े हैं। इन उद्योगों आटा चक्की से लेकर बुरांस का जूस बनाने का काम होता है।

यात्रा रूट पर बीस हजार धर्मशाला
सरकारी आंकड़े के मुताबिक यात्रा रूट पर करीब पांच हजार होटल, रिर्साट और धर्मशालाएं हैं। यह संख्या पंजीकरण कराने वालों की है। इसमें हरिद्वार और ऋषिकेश के होटल आदि शामिल नहीं हैं। सरकारी आंकड़ा हरिद्वार में करीब चार हजार होटल और धर्मशालाओं का है। एक अनुमान के मुताबिक यात्रा रूट पर ही होटल, लॉज, धर्मशालाओं की संख्या करीब 20 हजार होगी।

जाहिर है कि एक लाख से ज्यादा का रोजगार इससे जुड़ा है। करीब 12 हजार मैक्सी कैब, कार, जीप और बसें भी हैं। इसके अलावा गांवों से नींबू पानी, खीरा और अन्य स्थानीय उत्पाद लेकर सड़क पर पहुंचने वाले लोग भी हैं। इन सभी कमाई चार धाम यात्रा पर ही निर्भर है।

मसूरी, नैनीताल, दून भी प्रभावित
चारधाम रुकने से मसूरी, ऋषिकेश, देहरादून और नैनीताल आदि में रोजगार की दिक्कत होगी। टूर ऑपरेटर्स के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत बुकिंग रद्द कर दी गई। यही हाल अन्य स्थानों का भी है।

दिल्ली, पूना, आंध्र पर भी मार
इसका असर देश के अन्य हिस्सों पर भी पड़ा है। दिल्ली के एक टूर आपरेटर गंगा सिंह भंडारी के मुताबिक 99 प्रतिशत बुकिंग निरस्त कर दी गई है। आंध्र प्रदेश के एक टूर आपरेटर ने करीब 350 करोड़ के नुकसान का अनुमान किया है। यहां की लगभग सभी बुकिंग निरस्त हो गई हैं। लोग दक्षिण भारत के यात्रा स्थानों के बारे में पूछ रहे हैं।

25000 करोड़ की आय का था अनुमान
-2013-14 केलिए 25000 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है उत्तराखंड में पर्यटन से। शुरू के तीन माह में करीब 6000 करोड़ रुपये की आय हो चुकी है। प्रदेश की जीडीपी में करीब  30 प्रतिशत तक का हिस्सा है पर्यटन का।
(पीएचडी चैंबर्स ऑफ कामर्स के सर्वे के मुताबिक )

-उत्तराखंड की ओर करीब 4.70 करोड़लोगों के आने का अनुमान था। इसका करीब 52 प्रतिशत धार्मिक पर्यटन में शामिल होता। कांवड़ और अन्य धार्मिक यात्राओं को हटा दिया जाए तो करीब  40 लाख लोगों केचार धाम यात्रा में शामिल होने का अनुमान था। केदारनाथ के 2012 में ही 5.75 लाख लोगों ने दर्शन किए थे। 2002 में यहां केवल 1.69 लाख लोगों ने रुख किया था। 2012 में 5.95 लाख लोग बदरीनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे थे। 2002 में यहां केवल 1.34 लाख लोग आए थे।
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(राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए मास्टर प्लान के मुताबिक)

कौन कहां कितना खर्च करता है
उत्तराखंड की ओर रुख करने वाला पर्यटक औसतन प्रति दिन का खर्च
-1119 रुपये
बाहर से उत्तराखंड पहुंचने केलिए 153 रुपये
उत्तराखंड में स्थल तक पहुंचने के लिए-240 रुपये
आवासीय सुविधा-316
खान पान-225
खरीददारी-225
(वर्ल्ड टूरिज्म आर्गनाइजेशन, केंद्र सरकार और उत्तराखंड टूरिज्म बोर्ड का संयुक्त अध्ययन)

आर्कषण केमुख्य केंद्र
हरिद्वार-54.7 प्रतिशत
ऋषिकेश-46.04
बदरीनाथ-39 प्रतिशत
केदारनाथ-36 प्रतिशत
गंगोत्री-24 प्रतिशत
उत्तरकाशी-23 प्रतिशत
यमुनौत्री-18 प्रतिशत
हेमकुंड-16 प्रतिशत
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