राजस्थान का एक परिवार करीब चार दिन तक भूखा-प्यासा बदरीनाथ हेलीपैड पर मदद का इंतजार करता रहा, मगर प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई।
चार दिन बाद सेना के जवानों ने परिवार को सुरक्षित जोशीमठ पहुंचाया, जहां से उन्हें ऋषिकेश भेजा गया। यहां परिवार के सदस्यों ने यात्रा के दुखद अनुभव बांटे।
50 लोग गए केदानाथ और 200 बदरीनाथ
भरतपुर, राजस्थान के मनोज शर्मा अपनी पत्नी ममता शर्मा, बेटे चिन्मय शर्मा, बेटी प्रज्ञा शर्मा सहित 250 यात्रियों के साथ बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के लिए गए थे। बताया कि रुद्रप्रयाग से उनके साथ के 50 लोग केदारनाथ चले गए, जबकि बाकी दो सौ लोग बदरीनाथ रवाना हुए।
बदरीनाथ यात्रा करने वालों में उनका परिवार भी शामिल था। दल 14 जून की शाम बदरीनाथ पहुंचा। बताया कि इसके बाद शुरू हुई बारिश ने थमने का नाम नहीं लिया, लिहाजा उन्होंने 15 जून को भी बदरीनाथ में ही रुकने का निर्णय लिया।
बताया कि 16 और 17 जून को बारिश से क्षेत्र में तबाही मच गई।
फंस गए बदरीनाथ में
जगह जगह मार्ग और पुल क्षतिग्रस्त होने से हजारों यात्री बदरीनाथ धाम में ही फंस गए। यात्रियों की भगदड़ के बीच उनका परिवार अपने साथियों से बिछुड़ गया। यात्रियों को खाने और रहने की जगह तक नसीब नहीं हो रही थी।
बर्फीली हवाओं और बारिश के बीच कई रातें खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। मनोज ने बताया कि उनका परिवार बदरीनाथ हेलीपैड पर करीब चार दिन तक मदद का इंतजार करता रहा, मगर स्थानीय प्रशासन ने उनकी मदद नहीं की। बाद में सेना ने कमान संभाली।
30 लोग हैं लापता
इसके बाद हमें सुरक्षित जोशीमठ पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि उनके साथ के 50 लोग अब भी बदरीनाथ में फंसे हुए हैं। जबकि केदारनाथ गए 50 यात्रियों में से तीस लोग लापता बताए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।