जून में आई आपदा के बाद अब केदारनाथ मंदिर हमेशा के लिए मलबे से घिरा
रहेगा। ज्यूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में यह सामने आया है।
ईपीआईएल को केदारनाथ में मलबा हटाने का काम दिया जाना था, लेकिन बाद में विवादों के चलते फैसला लंबित कर दिया गया था। अब ज्यूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की रिपोर्ट ने ईपीआईएल के मंसूबों पर ही पानी फेर दिया है।
मलबा हटाना संभव नहीं
सूत्रों के मुताबिक जीएसआई की केंद्रीय कैबिनेट कमेटी को पहुंची रिपोर्ट में साफ कहा कहा गया कि केदारनाथ में मलबा हटाना अब संभव नहीं है। लिहाजा मौजूद मलबे को ही समतल करके बेस बनाकर अन्य विकास कार्य किए जाएं।
इस रिपोर्ट ने केदारनाथ से मलबे के हटाए जाने की संभावनाओं को खत्म कर दिया। राज्य सरकार कहना है कि केदारनाथ में जीएसआई की जो भी रिपोर्ट होगी, उसी के आधार पर काम किया जाएगा। लिहाजा अब ईपीआईएल को भी काम मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही।
ईपीआईएल उत्तराखंड में ब्लैक लिस्टेड कंपनी की श्रेणी में है। बताया गया कि कुछ साल पहले कंपनी को प्रदेश में सड़कें बनाने का काम मिला था। आधी-अधूरी सड़कें बनाकर कंपनी यहां से चली गई थी।
दागी कंपनी को काम देने की तैयारी थी
इस दागी कंपनी को अब केदारनाथ में काम देने की तैयारी थी। लेकिन जैसे ही ईपीआईएल का नाम आया, विपक्ष ने सरकार पर दागी कंपनी को शय देने का आरोप लगा दिया।
मामला तूल पकड़ता देख प्रदेश सरकार ने भी कदम पीछे खींच लिया। और यह कहना शुरू कर दिया कि ईपीआईएल को राज्य सरकार ने नहीं, बल्कि आर्कियोलाजी सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने बुलाया है। एएसआई के साथ मिल कर ईपीआईएल वहां नुकसान का अध्ययन कर रही है।
ईपीआईएल को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने एएसआई के साथ केदारनाथ में अध्ययन के लिए अपने साथ लिया है।
- अमित नेगी, प्रभारी सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय
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