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वनाग्नि से कार्बेट पार्क का 281 हेक्टेयर क्षेत्र राख

Mon, 02 May 2016 03:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रामनगर
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एमआई 17 से बुझाई जा रही जंगलों की आग
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कार्बेट टाइगर रिजर्व का बिजरानी रेंज फिर भीषण आग से धधक उठा। हालांकि कर्मचारियों ने समय रहते आग पर नियंत्रण कर लिया।
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पार्क वार्डन शिवराज चंद ने बताया आग से अब तक कार्बेट नेशनल पार्क का कुल 281 हेक्टेयर क्षेत्र जलकर राख हो गया है। रविवार दोपहर पार्क के बिजरानी रेंज के आमडंडा क्षेत्र में अचानक आग लग गई थी। इसके अलावा कालागढ़ रेंज में भी आग धधक गई।

दोनों इलाकों में लगी आग पर विभागीय कर्मचारियों ने देर रात में ही काबू पा लिया। वार्डन ने बताया कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ डिवीजन, रामनगर वन प्रभाग, बिजरानी रेंज में सबसे ज्यादा आग लगी है। जिसमें 71 हेक्टेयर रामनगर वन प्रभाग तथा शेष 210 हेक्टेयर क्षेत्र कालागढ़, बिजरानी का जला है। जबकि अन्य रेंज भी आग की चपेट में हैं।
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उन्होंने बताया आग पर काबू पाने के लिये 37 फायर स्टेशन बनाए गए हैं। जहां पर 24 घंटे वनकर्मियों को तैनात किया गया है। चंद ने बताया जंगलों में आग लगने से पानी की श्रोत सूख रहे हैं। ऐसे में स्रोतों को टैंकरों में पानी ले जाकर भरा जा रहा है, ताकि वन्य जीवों के व्यवहार में प्रभाव न पड़े।

पार्क का बफर जोन प्रभावित
दावानल से कार्बेट पार्क का बफर जोन ज्यादा प्रभावित हुआ है। पार्क निदेशक समीर सिन्हा के मुताबिक, जहां नुकसान हुआ है उसमें कार्बेट पार्क का बफर जोन और आबादी से लगा (कालागढ़ वन प्रभाग) हिस्सा ज्यादा है। जंगल में टैंकरों से पानी डालकर नमी बढ़ाई जा रही है। कृत्रिम जलाशयों में पानी भरा जा रहा है ताकि वन्यजीव बाहरी इलाके की तरफ नहीं जाए। पीआरडी जवानों को संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया है।

राजाजी पार्क में आग, एसडीआरएफ पहुंची
राजाजी नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व के गौरी रेंज में भी रविवार को आग लग गई। आग की लपटें तेजी से बढ़ती हुई देखकर एसडीआरएफ को मौके पर बुला लिया गया। राजाजी पार्क की निदेशक नीना ग्रेवाल ने बताया कि तेज हवा के कारण आग चिंगारी सूखे पत्तों में पहुंच गई। इस वजह आग भड़क गई। आग पर काबू पा लिया गया है।
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राज्य पक्षी मोनाल भी संकट में
दावाग्नि की चपेट में आने से अस्कोट कस्तूरा मृग विहार भी नहीं बच सका है। मृग विहार के दावानल की चपेट में आने से राज्य पशु कस्तूरा मृग, राज्य पक्षी मोनाल और राज्य पुष्प बुरांश पर भी संकट आ गया है। बेशकीमती जड़ी बूटियों को भी दावानल से नुकसान पहुंचा है।
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