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उत्तराखंड के सियासी संकट में कांग्रेस को बस एक ही आस

Sun, 17 Apr 2016 08:44 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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राष्ट्रपति शासन के बीच उत्तराखंड में मचे सियासी घमासान में कांग्रेस फिलहाल दल बदल कानून के तहत नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त होने को अपना सबसे मजबूत पक्ष मान कर चल रही है।
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भाजपा विधायक भीमलाल की सदस्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर से अभी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में अब अगर कांग्रेस सेंधमारी से बची रही तो बहुमत परीक्षण को पार पाने को कांग्रेस की पूरी उम्मीद है।

दल बदल कानून के तहत की गई कार्यवाही को कांग्रेस के बागी विधायक चुनौती दे चुके हैं। इतना होने पर भी कांग्रेस को पूरा विश्वास है कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अगली परीक्षाओं में भी खरा साबित होगा। खुद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इसी को मुख्य आधार भी मान रहे हैं।
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रावत भाजपा से यह सवाल भी पूछ रहे कि दल बदल कानून के तहत नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त होने के बाद भाजपा किस तरह से सरकार बनाने का दावा कर रही है। तकनीकि रूप से इस समय नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त हो चुकी है और इनके निर्वाचन क्षेत्रों को रिक्त घोषित किया जा चुका है।
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भीमलाल पर भी दल बदल की गाज गिरने की संभावना

हरीश रावत
अपनी तरफ से कोई कसर न छोड़ते हुए कांग्रेस चुनाव आयोग को भी इसकी जानकारी दे चुकी है। ऐसे में सदन में इस समय 61 सदस्य हैं। देर सवेर घनसाली विधायक भीमलाल पर भी दल बदल की गाज गिरने की संभावना है। ऐसा हुआ तो साठ सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस अपना पक्ष मजबूत मान कर चल रही है।

इसी स्थिति को देखते हुए कांग्रेस का पूरा ध्यान अब सेंधमारी से बचने पर है। कुछ और विधायकों के भाजपा से संपर्क में होने की चर्चाओं ने भी कांग्रेस को बैचेन किया हुआ है। ऐसे में कांग्रेस अपने दल को महफूज को रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।

कांग्रेस अपने और पीडीएफ के विधायकों को सम्मानित करने का ऐलान कर ही चुकी है। अब अपने कार्यक्रमों में भी कांग्रेस इन विधायकों को शामिल करने की तैयारी में है। सोमवार को प्रस्तावित मशाल जुलूस में भी सभी विधायकों को शामिल होने के लिए कहा गया है। इसी के साथ कांग्रेस की निगाह कोर्ट पर भी है।
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