उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा के प्रबंधन में राज्य की विजय बहुगुणा सरकार जिस तरह नाकाम रही है और मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर राज्य प्रशासन का जो निकम्मापन सामने आया है, उससे कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बेहद खफा है।
मुख्यमंत्री की मंत्रियों, विधायकों और पार्टी नेताओं के साथ संवादहीनता व अविश्वास को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा की देखरेख में राहत कार्यों को तेज करने के लिए दिल्ली से कुछ नेताओं को देहरादून भेजा है।
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कांग्रेस सेवादल के उपाध्यक्ष महेंद्र जोशी, सचिव संजय कपूर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य समेत कई नेताओं को देहरादून में कैंप कराकर राहत कार्यों में तेजी लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का ज्यादा समय दिल्ली में रहना, तबाही वाले दिन भी मुख्यमंत्री का दिल्ली में बने रहना खल रही है।
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इसके अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आपदाग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण करना जंच नहीं रही है।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
18 जून को देहरादून में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में केदारनाथ की तबाही को गंभीरता से न लेना और उसके बाद राहत कार्यों की समीक्षा के लिए कई दिनों तक मंत्रिमंडल की बैठक न बुलाना, राहत कार्यों की निगरानी के लिए मंत्रियों को प्रभावित इलाकों में न भेजना, खराब सेहत की वजह से रुद्र प्रयाग के जिलाधिकारी के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद पांच दिन तक वहां कोई अधिकारी न भेजना जैसे कदमों ने कांग्रेस नेतृत्व का सिरदर्द बढ़ा दिया है।
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कांग्रेस नेतृत्व को जो सूचना मिली है उसके मुताबिक तेज बारिश और बादल फटने की वजह से हुई तबाही की शुरुआत 16 जून की रात से हुई।
इसके पहले 13-14 जून से ही पहाड़ों पर जबरदस्त बारिश हो रही थी लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इसे अनदेखा करके यात्रा जारी रखी जिसकी वजह से हजारों लोग केदारनाथ, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और गंगोत्री और चार धाम यात्रा के मार्गों पर पहुंचते रहे।
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आश्चर्यजनक यह है कि हजारों लोगों की चार धाम यात्रा की राज्य सरकार कोई भी निगरानी नहीं करती। सारा दारोमदार बस और टूर ऑपरेटरों के भरोसे है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
इस बात का कहीं कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता कि कितने यात्री आए। उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की क्षमता से ज्यादा यात्री न पहुंचे इस पर कोई रोक नहीं है।
राहत राशि के सही उपयोग न होने का भी डर
शीर्ष नेता इस बात से चिंतित हैं कि शासन और प्रशासन की इस खस्ता हालत की वजह से आपदा से निबटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई एक हजार करोड़ रुपये की राहत राशि का सही उपयोग भी हो सकेगा या नहीं। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर इस राशि की बंदरबांट का भी डर सता रहा है।
भाजपा नेताओं की सक्रियता ने बढ़ाई बेचैनी
उधर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के अन्य भाजपा नेताओं की सक्रियता भी कांग्रेस नेताओं को डरा रही है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा पार्टी के लिए राज्य में सियासी आपदा न बन जाए।
मोदी शुक्रवार को उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए हैं जहां वह अपने राज्य के लोगों की मदद के साथ ही आपदाग्रस्त इलाका भी दौरा करेंगे।