सोमवार मध्य रात्रि भारी बारिश से मोख तल्ला गांव के बरसाती गदेरे में बादल फट गया। जिससे पांच आवासीय भवन ढह गए। ग्रामीणों की 200 नाली कृषि भूमि भी बह गई है। गदेरे के उफान से बांसबाड़ा गांव को भी खतरा हो गया है। रास्ते तहस-नहस होने से 70 परिवार गांव में कैद हो गए हैं।
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घाट क्षेत्र में सोमवार शाम से ही भारी बारिश हो रही थी। मध्य रात्रि को मोल तल्ला गांव के समीप बरसाती गदेरे के मुहाने पर बादल फटने से जीत सिंह बिष्ट, मोहन लाल, रघुलाल, मोहन सिंह और गुमान सिंह के भवन क्षतिग्रस्त हो गए। पेयजल लाइन भी ध्वस्त हो गई हैं। लुंथरा गांव में भी जगदीश सिंह और भक्त दर्शन के भावनाओं को खतरा हो गया है।
खुनाणा गांव में लक्ष्मी प्रसाद, ललिता और मंशाराम के मकान भी रहने लायक नहीं रह गए हैं। ऐसे में ग्रामीण पंचायत भवन पर शरण लिए हुए हैं। बेसिक स्कूल खुनाणा का भवन भी भूस्खलन की जद में आ गया है। खुनाणा-कांडई पैदल मार्ग भी ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों की करीब 300 नाली भूमि भी गदेरे में बह गई है। सरपाणी गांव के ठीक नीचे भूस्खलन हो रह है, जिससे गांव को खतरा पैदा हो गया है।
बांसबाड़ा गांव के बरसाती गदेरे में बादल फटने की सूचना पर राजस्व विभाग की टीम भेजी गई है। कोई जनहानि नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों को स्कूल भवन और पंचायत घरों में शिफ्ट किया गया है।
- नंद किशोर जोशी, आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली
बिनसर पहाड़ी से भूस्खलन, घरों में घुसा मलबा
भारी बारिश से बिनसर पहाड़ी से फिर भूस्खलन हुआ। जिससे कई दुकानें मलबे में दब गई हैं। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई। यहां नवनिर्मित तहसील भवन भी मलबे में दब गया है। जिला पंचायत का पैदल मार्ग और झूला पुल भी चुफलागाड़ के बहाव से चलने लायक नहीं रह गया है।
व्यापार संघ अध्यक्ष अर्जुन सिंह रावत का कहना है कि मुख्य बाजार में भरत सिंह कठैत, विक्रम सिंह, पंकज सयाना, सोहन सिंह और प्रताप सयाना की दुकानें मलबे में दब गई हैं। एसडीएम अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि लोगों को बाजार खाली करने के लिए कहा गया है।
खतरा भांप लोगों ने छोड़े अपने घर
घनसाली में ग्राम पंचायत कंडारस्यू के नौ आवासीय भवन भूस्खलन की जद में आ गए है। खतरे को भांपते हुए प्रभावित परिवार अन्य लोगों के घरों में शिफ्ट हो गए।
बारिश से कंडारस्यू गांव के ऊपर खोपड़ा तोक में भूस्खलन शुरू हो गया। जिससे संपत्ति देवी ,चैता देवी, प्रेमा देवी, शूरवीर सिंह, भीम सिंह, मानवेंद्र सिंह, शूरवीर सिंह रावत, मोर सिंह, पूर्व सिंह रावत के घरों के अंदर मलबा घुस गया। इससे मोटर मार्ग और नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीण मनमोहन डिमरी ने कहा कि शीघ्र भूस्खलन रोकने के लिए इंतजाम नहीं किए गए तो बड़ी घटना हो सकती है।
आपदा की भेंट चढ़े खेत
रुद्रप्रयाग में ग्राम पंचायत धारतोंदला के उप गांव अमरतोणा में भूस्खलन से खतरा हो गया है। ग्रामीणों के सिंचित खेत बहने से उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव का सर्वेक्षण कर भूस्खलन से सुरक्षा और प्रभावितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीण सरोज सिंह, विक्रम सिंह, कमल सिंह, पुष्कर सिंह, कुंवर सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि भूस्खलन सक्रिय होने से मकानों को भी खतरा हो गया है। ग्रामीण कुलदीप सिंह के आवासीय भवन के दोनों ओर भूस्खलन से मकान खतरे की जद में आ गया है। वहीं सिंचित कृषि भूमि बहने से उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
कुणजेठी में आवासीय भवनों पर पड़ी दरारें
गुप्तकाशी में कुणजेठी तल्ला को भूस्खलन से खतरा पैदा हो गया है। गांव के अनुसूचित जाति बस्ती में ग्रामीणों के मकानों पर दरारें आ गई हैं, जिससे वे दहशत में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उनकी सुध नहीं ली जा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता दिलबर सिंह रावत, सुदामा देवी ने बताया कि कुणजेठी तल्ला के अनुसूचित जाति बस्ती में 54 परिवार निवास करते हैं। वर्तमान में भूस्खलन से मकानों में दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीण रोशन लाल, नंद लाल, इंद्र लाल, शेरू लाल ने बताया कि वे दहशत के बीच जी रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से गांव का सर्वेक्षण कर सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
जलस्तर बढ़ने से बही पुलिया
उत्तरकाशी में असी गंगा घाटी के आधा दर्जन गांवों की मुसीबत कम होती नजर नहीं आ रही है। सोमवार की रात को हुई बारिश से असी गंगा का जल स्तर बढ़ गया। जिससे यहां ग्रामीणों द्वारा बनाई गई लकड़ी की पुलिया बह गई है। इससे गजोली, भंकोली, ढासडा, अगोड़ा, दंदाकला, सेकू गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। अब ग्रामीणों के लिए नजदीकी बाजार गंगोरी तथा उत्तरकाशी आने के लिए कोई रास्ता नहीं है।
नौगांव के बीच से बह रहे गदेरे में आए उफान से गांव पर खतरा मंडराने लगा है। गांव के तीन भवन खतरे की जद में आ गए हैं। कटाव से जयवीर सिंह का कोठार और मकान तथा चमन लाल का मकान खतरे में आ गया। इन मकानों को नुकसान होने पर पूरा गांव खतरे में आ जाएगा।
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